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आज कल आपको हर जगह क्रांति देखनो को मिल जाएगी। हाल ही में खबर आयी थी कि एक महिला काज़ी ने एक शादी में निकाह पढ़ाया। फिर इसके बाद खबर आयी कि एक बंगाली दुल्हन ने बिदाई के टाइम पर अपने रिशतेदारों द्वारा की जा रही रस्मों के बीच कह दिया कि हम बच्चे मां बाप का कर्ज़ नहीं उतार सकते हैं।
इसी क्रम में आज एक और खबर आयी जिसमें एक बंगाली शादी हुई, इस बंगाली शादी में कोई पुरुष पंडित नहीं था बल्कि महिला पंडित थीं जिन्होंने कि शादी संपन्न करायी। इन्होनें वहां पूरी शादी के विधि-विधान किये और लड़की को उसकी मां के नाम से बुलाया और बाद में उसके पिता के नाम से।
बता दें कि ये दोनों महिला पंडित कई साल से लोगों की शादियां करा रही हैं। काफी खोजने के बाद पता चला कि एक महिला पंडित का नाम है नंदिनी भौमिक। दोनो ही बंगाल की रहने वाली हैं। नंदिनी भौमिक के द्वारा कराई गई ये कोई पहली शादी नहीं है, बल्कि पहले भी ऐसी शादियां वो करा चुकी हैं। नंदिनी के द्वारा कराई गई शदियों की सबसे रोचक बात ये है कि उसमें कन्यादान नहीं होता है और साथ ही नंदिनी सारे मंत्र बंगाली और अंग्रेज़ी में पढ़ती हैं जिससे दूल्हा और दुल्हन को ये सब समझ आये। इतना ही नहीं जब नंदिनी सारे विधि-विधान कर रही होती है उस समय बैकग्राउंड में टैगोर का संगीत चल रहा होता है।
इस शादी में कन्यादान नहीं करने के पक्ष में एक अलग ही तर्क है। लड़की के पिता का कहना था कि मेरी बेटी कोई सामान नहीं है जो दान कर दूं। इस वाकया का पता लोगों को एक ट्विटर पोस्ट के ज़रिये चला । असमिता नाम की यूज़र ने इस बात को अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया था। जिसेक बाद सुबह होते होते ये पोस्ट काफी वायरल हो चुका था।
<blockquote class="twitter-tweet" data-lang="en-gb"><p lang="en" dir="ltr">I'm at a wedding with female pandits. They introduce the bride as the daughter of <mother's name> and <father's name> (mom first!!!). The bride's dad gave a speech saying he wasn't doing kanyadaan because his daughter wasn't property to give away. 🔥🔥🔥 I'm so impressed. <a href="https://t.co/JXqHdbap9D">pic.twitter.com/JXqHdbap9D</a></p>— Asmita (@asmitaghosh18) <a href="https://twitter.com/asmitaghosh18/status/1092427262115209222?ref_src=twsrc%5Etfw">4 February 2019</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
इतना ही नहीं इस यूज़र के ट्विट को पढ़कर आपको पता चलेगा कि इस लड़की के पिता ने एक मैसेज और भेजा था जिसमें ये समझाने की कोशिश की गई थी कि इस विवाह को गंधर्व विवाह कहते हैं और ये तर्क भी दिया गया था कि इसे गंधर्व विवाह क्यों कहते हैं। इनके पिता का कहना है कि बंगाली में इस तरह के विवाह को गंधर्व विवाह कहा जाता है क्योंकि गंधर्व विवाह में कन्यादान नहीं होता।
<blockquote class="twitter-tweet" data-conversation="none" data-lang="en-gb"><p lang="en" dir="ltr">The bride's father wanted me to post this clarification regd the right wing hate: Deciding not to do kanyadaan was an ideological decision that he believed in. But it also has scriptural sanction — read about Gandharva marriages. So hopefully this shuts the trolls up :). 👋🏽 <a href="https://t.co/IIR3hxcZiX">pic.twitter.com/IIR3hxcZiX</a></p>— Asmita (@asmitaghosh18) <a href="https://twitter.com/asmitaghosh18/status/1092994880534568960?ref_src=twsrc%5Etfw">6 February 2019</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
Author- Anida Saifi
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