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हम सिर्फ़ शरीर नहीं हैं। हमारे जीवन के कई आयाम हैं। उनमें से शरीर एक है, हमारा मन है, हमारी सांसें हैं, हमारा चैतन्य है और हमारे इमोशन हैं। इनके अलावा भी जीवन के कई सारे अन्य आयाम भी हैं या हो सकते हैं। आपको बता दें कि हमारी सांसों का सम्बन्ध सीधे तौर पर हमारे मन से होता है। सांस एक ऐसी चीज़ है, जो शरीर के अंतर और बाहर दोनों जगह की यात्रा करती है। इसलिए बड़ा ही स्पष्ट है कि यदि हमें शरीर के अन्दर यानी की मन और शरीर के बाहर एक सामंजस्य बनाना होगा तो सांसों के साथ जुड़ना होगा।
इस प्रकार, हमारी लव लाइफ़ में होने वाले ब्रेक-अप और उससे उपजे मानसिक थकान या फिर शारीरिक थकान ही सही, से उबरने के लिए हमें अपनी सांसों का सहारा लेना होगा, जोकि आपका मूड ही बदल देगा। वैसे भी हमें इस प्रक्रिया रूपी मंत्र को जानना बहुत ही ज़रूरी है, क्योंकि , हमारी लव लाइफ़ में होने वाले ब्रेक-अप कभी-कभी जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ जाते हैं।
आपको बता दें कि जब भी आप यह महसूस करें कि आप अकेले हैं, थके हुए हैं, मन से टूट रहे हैं और आपको थकान महसूस हो रही है तो फिर गहरी लंबी सांसें लेना शुरू कर दीजिए। ध्यान रहे कि इन सांसों में गहराई हो और लयबद्धता हो। आपको बता दें कि सांस लेने की प्रक्रिया आप अपनी नाभि से शुरू करें और फेफड़ों में भरते हुये उसे लयबद्ध तरीक़े से कण्ठ तक ले जायें। कण्ठ तक सांस ले जाकर आप वहां पर सांसों को थोड़ी देर रोकिए और फिर उसी लय के साथ धीरे-धीरे छोड़ना है।
ग़ौरतलब है कि लम्बी और गहरी सांस लेने से शरीर में ऑक्सीज़न की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे शरीर का थकान और मानसिक विकार दूर होता है। इससे फीलिंग कम होती हैं और आलस्य दूर जाता है, इससे आप पर ब्रेक-अब का तनाव बिल्कुल हावी नहीं होगा।
Author: Amit Rajpoot
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