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भारत में भले ही राष्ट्रीय भाषा के दर्जे को तरस रही हिंदी को अभी लोगों के उपेक्षाओं का शिकार होना पड़ता है, लेकिन वहीं विदेशों में अब हिंदी का महत्व बढ़ने लगा है और इसका सबसे उदाहरण है मुस्लिम देश अबू धाबी का हिंदी को लेकर किया जाने वाला ऐतिहासिक फैसला। जी हां, आपको बता दें कि अबू धाबी ने बड़ा फैसला लेते हुए अरबी और अंग्रेजी के बाद हिंदी को अदालतों में अपनी तीसरी आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल कर लिया है।
दरअसल, इसका मकसद अबू धाबी में मौजूद हिंदी भाषी लोगों को तक न्याय की पहुंच बढ़ाना है, ताकि वो आसानी से मुकदमे की प्रक्रिया, अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जान सके। असल में, तकरीबन नब्बे लाख की आबादी वाले इस देश में दो तिहाई प्रवासी हैं, जिसमें से लगभग एक तिहाई तो भारतीय ही हैं, ऐसे में इस एक तिहाई जनता तक कानूनी प्रक्रिया को सुगम बनाने के मद्देनजर ये फैसला लिया गया है।
इस बार में अबू धाबी न्याय विभाग ने शनिवार को बयान जारी करते हुए कहा कि अदालतों के समक्ष दावों के बयान के लिए भाषा के माध्यम का विस्तार करने के लिए श्रम मामलों में अरबी और अंग्रेजी के साथ ही हिंदी भाषा को शामिल किया गया है। इसके जरिए प्लान 2021 की तर्ज पर न्यायिक सेवाओं को बढ़ावा देना और मुकदमे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है।
वैसे देखा जाए तो धीरे-धीरे हिंदी भाषा के प्रति देश-विदेश में लोगों का रूझान बढ़ रहा है। इसका प्रभाव सोशल मीडिया पर भी अब दिखने लगा है, बॉलीवुड महानायक से लेकर दूसरे नए कलाकार भी अब सोशल मीडिया पर हिंदी भाषा का प्रयोग करने लगे हैं। इंटरनेट के माध्यम से इस भाषा का विस्तार हुआ है... हिंदी का साहित्य, हिंदी की वेब सीरीज से लेकर हिंदी के कैप्शन अब प्रचलित हो चुके हैं। जाहिर है धीरे-धीरे ही सही हिंदी का प्रभुत्व अब बढ़ रहा है, जो हम सब देशवासियों के लिए गौरव की बात है।
Author: Yashodhara virodai
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