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आज हर कोई नगरों और महानगरों की ओर आकर्षित होता चा जा रहा है। कोई भी महानगरों की चकाचौंध के आगे ग्रामीण युवतियों का ख़्याल नहीं करता है। ऐसे में उम्मीद की मिसाल बनकर सामने आयी हैं एक महिला पहलवान- बबीता नागर। आपको बता दें कि महिला पहलवान बबीता नागर ग्रामीण क्षेत्र की युवतियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें काबिल बनाने में लगी हुई है। नोएडा के सादुल्लापुर गांव में एक साधारण परिवार में जन्मी बबीता नागर लड़कियों के लिए आदर्श बन चुकी हैं। बबीता बचपन से ही लड़कों की तरह रहना पसंद करती थीं। इतना ही नहीं, बबीता ने खेल भी लड़कों वाला ही चुना और वह था-कुश्ती। कुश्ती की बदौलत वह दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर बनीं और फिर ग्रामीण इलाक़े की बेटियों को नौकरी के लिए प्रोत्साहित करने लगी।
दिलचस्प है कि बबीता नागर राष्ट्रीय स्तर की पहलवान है। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया है। बबीता ने गांव में ही युवतियों को प्रशिक्षण देने के लिए निःशुल्क केंद्र खोला है। गांव की बेटियों को पुलिस फोर्स में भर्ती कराने के लिए उन्होंने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। उनकी मेहनत रंग लायी। आज सादुल्लापुर गांव की लड़कियां ही नहीं, बल्कि उस गांव की विवाहिता महिलाओं ने भी दिल्ली पुलिस में चयनित होकर ये साबित कर दिया कि बबीता की प्रेरणा बेकार नहीं गयी।
आपको बता दें कि बबीता की प्रेरणा से करीब 80 लड़कियां और शादीशुदा महिलाएं दिल्ली और यूपी पुलिस में तैनात है। यही नहीं बबीता से प्रभावित होकर सादोपुर, बादलपुर और अच्छेजा गांव की लड़कियां भी आगे आयी हैं। बबीता नागर बताती हैं कि समाज में लड़कियों को कमजोर माना जाता है, लेकिन अगर सही मौका मिल जाए तो वह किसी से कम नहीं हैं। मैं लड़कियों को उनके पैरों पर खड़ा करने का प्रयास कर रही हूं। इनके इरादे तो मजबूत हैं, लेकिन मौका नहीं मिल पा रहा है।
Author: Amit Rajpoot
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