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14 जून, 1989 को पहली बार पुनीत शर्मा भारतीय वायुसेना में जहाज उड़ाने की जिम्मेदारी पर गए थे। उन्होंने अपने अब तक के करियर में 9000 से ज्यादा घंटे आसमान में बिताए हैं। इसमें व्यवसायिक उड़ानों का अनुभव भी शामिल है। फिलहाल वह एक निजी विमानन कंपनी में बोइंग विमान उड़ाते हैं। करीब 4 साल पहले उन्होंने इस आसमानी काम के अलावा जमीन से जुड़ने का फैसला किया। उस वक्त पूरे देश में स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत हो चुकी थी, क्योंकि तमाम उड़ानों के कारण उन्होंने दुनिया की साफ-सुथरी तस्वीरें अपनी आंखों से निहारी थीं। इसलिए अपने देश को साफ-सुथरा बनाने का सरकारी प्रयास उन्हें बहुत भाया। उन्होंने तय किया कि वह अपने स्तर से इस अभियान का हिस्सा बनेंगे।
पुनीत शर्मा ने कुछ लोगों को अपने साथ लिया और अक्टूबर, 2014 में पुणे रेलवे स्टेशन पर पहला स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किया। उन्हें पता था कि रेलवे स्टेशन एक ऐसी जगह होती है जहां ज्यादा से ज्यादा लोगों को संदेश दिया जा सकता है। ऐसा हुआ भी। यात्रियों का बड़ा हिस्सा उनके काम से प्रभावित होता दिखा। कम से कम उस वक्त उन लोगों ने पुनीत और साथियों से यह वादा किया था कि वह इस मुहिम को आगे बढ़ाएंगे। पुनीत शर्मा बताते हैं कि मैं अपनी शुरुआत से बहुत उत्साहित था। मैंने अपने स्वच्छता कार्यक्रमों की तस्वीरें फेसबुक के माध्यम से प्रसारित करनी शुरू कर दी। मैं हर जगह की पहली गंदी तस्वीर और बाद की साफ-सुथरी फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट करता। इस प्रयास से कई लोग और भी मेरी इस नेक मुहिम का हिस्सा बन गए।
उनकी टीम की क्षमता बढ़ते ही उन्होंने शहर के लगभग सभी बड़े जमावड़े वाली जगहों को स्वच्छ करने की मुहिम शुरू की। इसका असर यह हुआ कि बड़ी संख्या में युवा उनसे जुड़ गए। दिलचस्प है कि तीन महीने नहीं बीते थे कि उन्होंने देखा शहर में कई अन्य संस्थाएं भी बिल्कुल उनके मॉडल को अपनाते हुए स्वच्छता अभियान में अपना योगदान दे रही है। इस तरह से देखते ही देखते आज पुनीत शर्मा औरों के लिए स्वच्छता की एक मिसाल बन बैठे।
Author: Amit Rajpoot
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