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ईश्वर को प्राप्त करने के कई मार्ग बताए गये हैं, लेकिन एक मार्ग कोई नहीं जानता! जी हाँ, वैसे तो ईश्वर को पाना बेहद कठिन है, लेकिन आज हम आपको एक कथा के माध्यम से यह बताने जा रहे हैं कि ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग क्या है। दरअसल, एक बार एक संत से किसी व्यक्ति ने शिकायत की कि हम ईश्वर का स्मरण करते हैं। पूजा-पाठ करते हैं, किंतु वह तो आता ही नहीं। उसका तो हमारी ओर ध्यान ही नहीं दिखता और ना ही कभी ऐसा लगता है कि वह हमारी तरफ ध्यान ही दे रहा है।
संत ने उस व्यक्ति को उत्तर दिया कि यह सत्य है कि तुम ईश्वर का नित्य स्मरण करते हो और यह भी सत्य है कि तुम उसकी नित्य पूजा भी करते हो, किंतु मुझे यह बताओ कि क्या तुम उससे प्रेम करते हो? क्या ईश्वर के प्रति तुम्हारी निष्काम श्रद्धा है? तुम तो उसकी अवज्ञा करते हो और नियमों का पालन ठीक तरह से करते भी नहीं हो। स्वर्ग का द्वार तुम्हारे लिए खुला है मगर तुम उस द्वार तक पहुंचने का प्रयास नहीं करते। तुम्हें यह भी अच्छी तरह से मालूम है कि मृत्यु अवश्यंभावी है और कभी भी आ सकती है, मगर तुमने कभी भी उसके सामने आने की तैयारी नहीं की। तुम यह जानते हो कि शैतान तुम्हारा शत्रु है फिर भी तुम उसे गले से लगाए रखते हो। यदि तुम्हारी हार्दिक इच्छा है कि ईश्वर तुम्हारे पास आए तो प्रथम तुम्हें अपना हृदय पवित्र रखना होगा।
संत ने आगे कहा कि याद रखो भोगों से अनासक्ति और ईश्वर से अनुरक्ति ही तुम्हें ईश्वर के पास ले जा सकती है। इसलिए हमेशा आसक्ति से दूर रहो और ईश्वर से अपनी आशा और विश्वास को कायम करो। दूसरों को कष्ट पहुंचाना, गरीब और असहायों की मदद करना और हर प्राणी मात्र के प्रति प्रेम, करुणा और संवेदना का भाव रखना जरूरी होता है। इसलिए ईश्वर उसी को प्यार करता है, जो उसके हर किसी से प्यार करता है। इसलिए ईश्वर को पाने के लिए अपना हृदय निर्मल रखो, किसी की बुराई ना करो। सदा सत्य बोलो और बिना कपट के सभी के साथ व्यवहार करो। यही ईश्वर प्राप्ति का एकमात्र और सबसे सरल नियम है।
Author: Amit Rajpoot
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