Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
बच्चा अपनी ही आंखों से सपने देखए तभी भला है। लेकिन आज सिर्फ बच्चा ही नहीं, बल्कि हर माता-पिता अपने बच्चे के बेहतर भविष्य का सपना देखते हैं। हर कोई चाहता है कि उनका बच्चा एक बेहतर स्कूल में पढ़े, उसे आगे चलकर एक अच्छे कॉलेज में दाखिला मिले, पढ़ने लिखने के बाद बढ़िया नौकरी मिले और भविष्य में बेहतर मुकाम हासिल करें बच्चों को सही दिशा दिखाना माता पिता का काम है। लेकिन कई बार बच्चों का सपना और माता-पिता का सपना एक जैसा नहीं होता। माता-पिता बच्चे को किसी बड़े ऑफिस में एक बड़ी पोस्ट पर देखना चाहते हैं, तो वहीं बच्चे का सपना डांस करना, एक्टिंग करना या किसी क्रिएटिव क्षेत्र में काम करने का हो सकता है। जरूरी है कि बच्चों की इच्छा, पसंद और नापसंद उनके कौशल और प्रतिभा को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी रुचि की पहचान की जाए। उन्हें सपने देखना सिखाया जाए और सपने को साकार करने का रास्ता दिखाया जाए।
आपको बता दें कि बच्चे सपने देखें तो देखने दें। उन्हें रोकिए नहीं। उनके सपनों को पंख दें। रास्ता दिखाएं। जरूरी नहीं कि आपने जो सपना देखा हो उस सपने में बच्चे भी अपना सपना देखें। अलग रास्ता बनाना चाहते हैं, तो उन्हें हौसला दें। यानी कि उन्हें अपनी आंखों से सपने देखने दें, क्योंकि कई सर्वे से पता चलता है कि भारतीय माता-पिता अपने बच्चों की खुशियां उनके सपनों की बजाय उनके करियर को ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं। हमारे पड़ोसी के रिश्तेदार चाहते हैं कि उनका बेटा इंजीनियरिंग में दाखिला ले, क्योंकि उनके दादा, नाना से लेकर चाचा, मामा हर कोई इंजीनियर है।
हालांकि बेटे इंजीनियरिंग समझ नहीं आती है। हां, बेटे का मन किचन में खूब लगता है। जब भी उसके हाथों कोई डिश बनती है, तो पूरा परिवार उंगलियां चाट-चाट कर खाता है। लेकिन शायद माता पिता ने उसके इस कौशल को महत्व ही नहीं दिया। कई बार बच्चे की रुचि माता-पिता की रुचि से मेल नहीं खाती है। ऐसे में अक्सर बच्चा कुछ और करना चाहता है। मगर माता-पिता उस पर कुछ और करने का दबाव बनाते हैं। ऐसी स्थिति में ज्यादातर बच्चे फैसले पर खरे नहीं उतर पाते हैं, जिससे ज्यादातर उन्हें असफलता हाथ लगती है।
Author: Amit Rajpoot
YOUR REACTION
  • 0
  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.