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मनन अपने ऑफिस से निकला ही था, कि उसे जोर की भूख लगी उसने रास्ते में एक दुकान पर गाड़ी रोकी और बर्गर व कोल्डड्रिंक ऑर्डर किया। जब तक उसका ऑर्डर आ रहा था, उसने देखा कि एक बूढ़ा आदमी दुकान के ठीक बाहर पड़े एक बड़े से कूड़ेदान को टटोल रहा था। जिज्ञासा वश मनन कूड़ेदान के पास जाकर खड़ा हो गया। उसने देखा कि वह बूढ़ा व्यक्ति कूड़ेदान से एक-एक लिफाफा निकालकर खाने के टुकड़े इकट्ठा कर रहा है। मनन का बर्गर पैक हो गया था, तो वह अपनी गाड़ी में बैठ गया। पर उसकी नजरें अब भी उसी बुज़ुर्ग पर ही टिकी थीं।
उस बूढ़े ने खाद्य पदार्थ रुमाल में बिछा लिया और वहीं बैठकर खाने लगा। ये देखकर मनन को गुस्सा आ गया। गाड़ी से बाहर निकलकर उसने बूढ़े से कहा गंदगी फैलाने के लिए तुझे और कोई जगह नहीं मिली थी। मनन को गुस्सा होते देखकर दुकान का मैनेजर वहां आ गया। मनन ने उनसे कहा आप लोग ऐसे भिखारियों को अपनी दुकान के सामने बैठने कैसे देते हैं। मैनेजर बोला, माफ कीजिएगा यह आदमी भिखारी नहीं है। आपको गलतफहमी है। मनन हैरान था कि मैनेजर मनन की तरफदारी करने के बजाय उस बूढ़े का पक्ष ले रहा है। तभी वह बूढ़ा आदमी मनन से कहने लगा कि अगर आपको बुरा लगा हो तो माफ कीजिएगा। आपको पता नहीं कि यह दुकान कभी मेरी ही थी। लेकिन बूढ़े होने पर मैंने इसे अपने बेटे के नाम कर दिया। फिर एक दिन मुझे पता चला कि मुझे कैंसर हो गया है। कैंसर का पता चलते ही मेरे बेटे ने मुझे घर से बाहर निकाल दिया। इस दुकान ने जिंदगी भर मेरा पेट भरा है। आज भी मैं इसी के सहारे जिंदा हूं।
उस बूढ़े ने खाद्य पदार्थ रुमाल में बिछा लिया और वहीं बैठकर खाने लगा। ये देखकर मनन को गुस्सा आ गया। गाड़ी से बाहर निकलकर उसने बूढ़े से कहा गंदगी फैलाने के लिए तुझे और कोई जगह नहीं मिली थी। मनन को गुस्सा होते देखकर दुकान का मैनेजर वहां आ गया। मनन ने उनसे कहा आप लोग ऐसे भिखारियों को अपनी दुकान के सामने बैठने कैसे देते हैं। मैनेजर बोला, माफ कीजिएगा यह आदमी भिखारी नहीं है। आपको गलतफहमी है। मनन हैरान था कि मैनेजर मनन की तरफदारी करने के बजाय उस बूढ़े का पक्ष ले रहा है। तभी वह बूढ़ा आदमी मनन से कहने लगा कि अगर आपको बुरा लगा हो तो माफ कीजिएगा। आपको पता नहीं कि यह दुकान कभी मेरी ही थी। लेकिन बूढ़े होने पर मैंने इसे अपने बेटे के नाम कर दिया। फिर एक दिन मुझे पता चला कि मुझे कैंसर हो गया है। कैंसर का पता चलते ही मेरे बेटे ने मुझे घर से बाहर निकाल दिया। इस दुकान ने जिंदगी भर मेरा पेट भरा है। आज भी मैं इसी के सहारे जिंदा हूं।
मनन कुछ देर के लिए उस आदमी को खड़ा होकर देखता रह गया। साफ है कि इससे हमें इस बात का पता चलता है कि हमारी जिंदगी में कुछ भी स्थाई नहीं है। इसलिए जो भी चीज हमारे पास है हम उसको तवज्जो दें और उसको पूरे सम्मान के साथ देखें और उसके साथ अच्छा व्यवहार करें। अन्यथा बेकार हो जाने पर उस बूढ़े व्यक्ति की तरह ही लोग बाहर निकालकर आपको फेंक देंगे।
Author: Amit Rajpoot
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