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दुनियाभर की तमाम मुश्किलों, दुःख और तनाव के बादलों को आप एक विस्फोट से उड़ा सकते हैं। जी हां, यह विस्फोट है हंसी। हंसी एक बेहद दिलचस्प चीज है, जिसका सीधा पूरा का पूरा स्वामित्व आप पर है। आप चाहे तो हंसे और आप चाहे तो रोयें। सबको एक-दूसरे से जोड़ने, दुनियाभर में प्रेम की महक बिखेरने का सबसे बड़ा अस्त्र आपके पास है। हंसी के रूप में आप चाहें तो कमाल कर सकते हैं। बस इसका उपयोग कीजिए और दिखा दीजिए तीली मुस्कान के बारूद को। जी हां, “अपने अंदर की खुशबू से काम लें, किसी खिलते हुए फूल का नाम लें।” कुंवर बेचैन की इस ग़ज़ल का मतलब प्रसन्नता को उसके हर कोण से बयां कर देता है।
अमेरिका जैसे देशों में तो खुश या प्रसन्न रहने के लिए दवा की गोलियां खाई जाती हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि ऐसी गोलियां वहां पर उनकी दुकान पर बिना पर्ची के मिल जाती हैं। अमेरिका दिन-ब-दिन अकेला होता जा रहा है, इसलिए बाहर और भीतर से उसमें खाली पन आता जा रहा है। यही कारण है कि उन्हें नकली प्रसन्नता की ज़रूरत पड़ती है। पर हमारे देश में ऐसा नहीं है, हमारे यहां का समाज आज भी काफी कुछ आपस में बंधा हुआ है। इसलिए आदमी तन्हा नहीं हो सकता। उसके अंदर और बाहर ऐसे कई कारण रोज पैदा होते रहते हैं, जिससे वह खुश रह सकता है।
प्रसिद्ध विचारक स्वेट मार्डन ने प्रसन्नता के भाव पर बहुत गहराई से विचार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि भारत में बैलों एवं गायों के गले में घुंघरू की घंटियां बांधे जाने का मनोवैज्ञानिक कारण है। उनके गले की घंटियों की आवाज संगीत की तरह घूमती है। पशुओं को भी संगीत प्यारा लगता है। वह उन्हें प्रसन्न रखता है। इसी के प्रभाव से गाय दूध देती हैं। घोड़े और अधिक काम करते हैं। जल्दी थकते नहीं।
ऐसे ही संगीत की तरह ही हमारी हंसी हार्दिक होकर दिल से निकली हो, तो वह भी संगीत जैसा ही प्रभाव छोड़ती है। ऐसी हंसी सारे दुःखों को ध्वस्त कर देती है। आपको बता दें कि जो व्यक्ति काम करते समय गुनगुना रहता है, वह अन्य लोगों की अपेक्षा अधिक काम करता है और धैर्यवान भी रहता है। रिसर्च बताती है कि खुश रहने वाले लोग अधिक जीते हैं। यह याद रखिए ईश्वर पर पूर्ण विश्वास, सरल स्वभाव और जीवन से में मिलने वाले आनंद पर विश्वास करते हुए प्रसन्न रहिए।
विख्यात विचारक अरस्तू का हवाला देते हुए स्वेट मार्डन ने लिखा है, कि जो लोग विषम परिस्थितियों में भी मुस्कुरा देते हैं, उन्हें कष्ट भी सुखद लगने लगता है। ना मुस्कुराने वाले लोगों को अपना आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। देखें कि वह क्यों नहीं मुस्कुरा पा रहे हैं। मुस्कुरा नहीं पाने का कारण सहज ही मिल जाएगा। उस कारणों को दूर करने में ज्यादा देर नहीं लगती। आप अभी जिस काम में लगे हैं, गाते गुनगुनाते हुए उसे पूरा कीजिए।
Author: Amit Rajpoot
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