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एक अध्ययन के अनुसार गर्भावस्था के दौरान डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ खाना ना केवल आपके होने वाले बच्चे को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि आपके ओवेरियन सिस्टम को भी प्रभावित करता है। इसकी वजह ये है कि इनमें बीपीए रसायन का इस्तेमाल किया जाता है। जिसकी सबसे अधिक मात्रा डब्बा बंद भोजन में पाया जाता है।
यह जांचने के लिए कि क्या प्रसव-पूर्व पर्यावरणीय जोखिम महिलाओं के ओवेरियन फंक्शन के लिए एक वास्तविक खतरा पैदा कर सकता है ? बोस्टन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने 2000 से 2018 तक इस पर रिसर्च किया। इस शोध के सदस्य यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर महालिंगैया ने बताया कि उन्होंने इस शोध में ये पाया कि जन्म से पहले की अवधि में इन जोखिमों के प्रभाव बढ़ रहे हैं।
दरअसल बीपीए भ्रूण, बच्चों और वयस्कों के अंतःस्रावी तंत्र को बाधित करने के लिए जाना जाता है। इसकी वजह से इंसान में दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव के साथ-साथ प्रजनन स्वास्थ्य परिणाम भी सामने आते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार ओवेरियन, शरीर के विकास और कार्य प्रक्रियाओं की एक जटिल समन्वय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो प्रसवपूर्व विकास के दौरान जल्दी शुरू होता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि उनके निष्कर्ष विशेष रूप से प्रासंगिक हैं क्योंकि बीपीए भ्रूण और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए निहितार्थ हैं। महालिंगा के मुताबिक डिम्बग्रंथि परिणामों पर बीपीए एक्सपोजर के प्रभाव को समझने से बीमारियों और विकारों के उपचार के दृष्टिकोण में योगदान हो सकता है। इसमें ओवेरियन डिजीज, बांझपन, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम और समय से पहले डिम्बग्रंथि विफलता शामिल हैं।
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