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बदलती जीवन शैली का दुष्प्रभाव सिर्फ बड़ों पर ही नहीं, बच्चों पर भी पड़ता है। वह तरह-तरह की बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। आपको बता दें कि आप ऑफिस जाती हैं। रात को देर से घर आती हैं और कई बार घर पर भी ऑफिस का काम करती है। इसके चलते आप बच्चे पर भी पूरा ध्यान आप नहीं दे पातीं। ध्यान रखें कि आप की दिनचर्या का असर आपके बच्चों पर भी पड़ता है, जिसके कारण वे कई प्रकार की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल के कंसल्टेंट डॉ. हिमांशु बत्रा कहते हैं कि हर मां चाहती है कि उसका बच्चा स्वस्थ हो। लेकिन बच्चों की बदलती जीवनशैली के कारण से मोटापा और अस्थमा की समस्याएं तथा एलर्जी के साथ-साथ तनाव और मानसिक बीमारियों के शिकार भी हो जाते हैं। लेकिन उनके जीवन शैली में कुछ परिवर्तन कर आप उन्हें इन बीमारियों से दूर रख सकती हैं। आइए जानें बच्चों की बीमारियों को दूर करने का सही तरीका क्या है।
मोटापा:
बचपन में होने वाला मोटापा आगे चलकर वयस्क अवस्था में मधुमेय, उच्च रक्तचाप और ऐसी कई बीमारियों को पैदा कर सकता है। इसलिए बच्चों के खान-पान और उनकी दिनचर्या को बदलें। कार्बोनेटेड पेय पदार्थ में उच्च कैलोरी युक्त खाद्य पदार्थ जैसे- फास्ट फूड और तले हुए पदार्थों का सेवन कम करें। उनके आहार में अधिक से अधिक फल और सब्जियों को शामिल करें और एक निश्चित दिनचर्या बनाएं। इसमें भी पूरे परिवार के साथ रात का खाना खाएं। उन्हें शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें और व्यवस्थित तरीके से मोबाइल और टीवी जैसे साधनों से दूर रखें।
अस्थमा:
अस्थमा एक एलर्जी प्रतिक्रिया है, जो एलर्जी पैदा करने वाले तत्व के कारण होता है। इसकी वजह से बच्चों को खांसी और फफूंदी या दूसरी तरह की समस्याएँ होती हैं। इसमें सांस लेने में समस्या हो सकती है। ऐसे में एलर्जी रोकने का सबसे अच्छा तरीका है, कि इसके संपर्क में आने से बचें। घर पर हेपा-फिल्टर से लैस एयर प्यूरीफायर लगाएं और जब बच्चे बाहर जाएं तो उनको एन-95 मास्क जरूर पहनाएं। प्रदूषण की स्थिति में घर के बाहर खेलने-कूदने से बच्चों को रोकें और घर के अंदर होने वाली गतिविधियों के लिए उनको प्रोत्साहित करें। यदि आपके बच्चे को सांस संबंधी बीमारी है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सप्ताह में एक बार गर्म पानी से बच्चे की चादर और कंबल को जरूर धोएं।
मनोवैज्ञानिक समस्या और चिंता:
कई बच्चे मनोवैज्ञानिक समस्याएं जैसे चिंता, मनोदशा विकार और अवसाद आदि का शिकार हो जाते हैं। इनमें कुछ के लिए तो मनोवैज्ञानिक कारक जिम्मेदार है, जबकि कुछ बच्चे पर्यावरण में होने वाले बदलाव के चलते इन बीमारियों की चपेट में आते हैं। इसलिए जरूरी है कि इससे बचाव के लिए आप बच्चों के चारों ओर एक स्वस्थ वातावरण बनाए।
Author: Amit Rajpoot
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