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आमतौर पर लोग सेना और अर्द्ध सेना के बीच फर्क नहीं जानते हैं, दोनो में तैनात कर्मी आम जनता के लिए सिर्फ जवान कहलाते हैं। जबकि असल में दोनो में काफी अंतर है। ऐसे में आज हम आपका परिचय देश की पैरामिलिट्री फोर्स से कराने जा रहे हैं और बताएंगे कि कैसे ये मिलिट्री से अलग है।
दरअसल, सेना के पास जहां देश की वाह्य सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, वहीं अर्धसैनिक बल देश की आंतरिक और वाह्य सुरक्षा के साथ ही आतंकवाद औऱ नक्सलवाद जैसे विरोधी अभियानों में भी लगे हुए हैं। मुख्यतौर पर बात करें तो भारत में सात तरह की पैरामिलिट्री फोर्स काम करती है... सीआरपीएफ, बीएसफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी, आसाम राइफल्स और एनएसजी। तो चलिए जानते हैं कि क्या है पैरामिलिट्री फोर्स और कैसे इसके विभिन्न अंग काम करते हैं।
सीआरपीएफ
सीआरपीएफ यानी केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल देश के पास देश की आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में इसका काम देश में उपजने वाले आतंरिक विवादो से निपटना होता है, वे चाहें उत्तर पूर्व के राज्यों में नक्सल की समस्या हो या फिर जम्मू व कश्मीर में फैला आतंक का साया। इसके साथ ही देश की संसद सुरक्षा के अलावा वीवीआईपी लोगों की सुरक्षा में भी सीआरपीएफ के जवानो की ही तैनाती होती है। वहीं देश के बड़े धार्मिक स्थल जैसे कि राम जन्मभूमि मंदिर, कृष्ण जन्म भूमि मंदिर, काशी-विश्वनाथ मंदिर आदि की सुरक्षा की जिम्मेवारी भी इन्ही के पास है।
बीएसफ
बीएसफ यानी कि बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स देश की सीमा पर तैनाती की जाती है, जिसकी जिमेमदारी भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की निगरानी और सुरक्षा के साथ सीमा पर अंतर्राष्ट्रीय अपराध को रोकना है। वैसे आपको बता दें कि बीएसफ विश्व का सबसे बड़ा सीमा रक्षक बल है, जिसका गठन 1 दिसम्बर 1965 में हुआ था।
आईटीबीपी
आईटीबीपी यानी कि भारतीय तिब्बत सीमा बल, चीन से लगी हुई में भारत-तिब्बत सीमा की सुरक्षा जिम्मेवारी सम्भालता है।
सीआईएसएफ
सीआईएसएफ यानी कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के पास देश के महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा की जिम्मेवारी होती है।
एसएसबी
एसएसबी यानी कि सशस्त्र सीमा बल भी भारत का एक प्रमुख अर्धसैनिक बल है जो कि 1,751 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है।
असम राइफल्स
असम राइफल्स, देश का सबसे पुराना पुलिस बल है, जिसका गठन 1835 में कछार लेवी के नाम से किया गया था। वर्तमान समय में इसमें 46 बटालियन हैं और इसके पास पूर्वोत्तर क्षेत्र की आंतरिक सुरक्षा के साथ ही भारत-म्यांमार सीमा की सुरक्षा का उत्तरदायित्व है।
एनएसजी
एनएसजी यानी कि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड, केन्द्रीय अर्द्धसैनिक बल के अंतर्गत आती है, इसका उपयोग आतंकवाद विरोधी गतिविधियों में किया जाता है।
Author: Yashodhara Virodai
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