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हिन्दुकुश एक पर्वतमाला है, जो मध्य अफ़गानिस्तान से लेकर उत्तर पाकिस्तान तक फैली हुयी है। वास्तव में हिन्दुकुश पर्वतमाला उत्तर-पश्चिम में हिमालय पर्वत श्रेणी का ही विस्तार है। यह 800 किमी. तक लंबी तथा 200-300 किमी. तक चौड़ी है। हिन्दुकुश पर्वतमाला को प्रचीन भारत में पारियात्रा पर्वत श्रेणी के नाम से भी जानते हैं। दिलचस्प है कि जब सिकन्दर ने जब हिन्दुकुश क्षेत्र में जीत हासिल की थी, तो उसने हिन्दुकुश पर्वतमाला को यूनानी भाषा में कॉकाशोश इंदिकोश के नाम से पुकारा था, जिसका हिन्दी में मतलब होता है- भारतीय पर्वत।
सिकन्दर के बाद हिन्दुकुश के क्षेत्र में उसके सेनापति सेल्युकस का अधिकार हो गया था, जिसे सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने 305 ईसा पूर्व में पराजित कर हिन्दुकुश के क्षेत्र को एक बार फिर से मुक्त करा लिया था। हिन्दुकुश पर्वतमाला को हिन्दूकेश के नाम से भी जाना जाता है, जिसका मतलब है कि भारतवर्ष के शीर्ष यानी कि ऊपर स्थित अंग। इसके अलावा हिन्दुकुश पर्वतमाला को पारसी भाषा में हिन्दू-कू और कू-ए-हिन्दू के नाम से जाना जाता है। फारसी भाषा में कू का अर्थ होता है-पहाड़। ग़ौरतलब है कि हिन्दुकुश पर्वतमाला में कई ऐसे अद्भुत रास्ते हैं, जिनके सहारे चीन, रूस, मंगोलिया, कज़ाक़िस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उजबेकिस्तान जैसे देशों में जाया जा सकता है।
एक कहानी ऐसी भीः
हिन्दुकुश पर्वतमाला की एक कहानी यह भी है कि यह एक ऐसी पर्वतमाला है, जहाँ पर हिन्दुओं को मार डाला गया है। ऐसा इस बात से भी पुष्ट होता, क्योंकि उर्दू भाषा में कुश का अर्थ होता है- मरना या मारना। असल में यह इसलिए माना जाता है, क्योंकि जब तैमूर लंग 1399 ई. में कई हज़ार हिदुओं के ग़ुलाम बनाकर भारत से समरकंद ले जा रहा था, तो हिन्दुकुश के ऊपर से गुजरते हुये आधे से ज़्यादा हिन्दू मारे गये थे। इसी घटना के बाद इस पर्वत श्रेणी का नाम हिन्दुकुश पड़ गया। कुल मिलाकार ऐसे कई और भी कारण हैं, जो इस बात के प्रमाण हैं, कि हिन्दुकुश हिन्दू मतावलंबियों की क़त्लगाह है।
Author: Amit Rajpoot
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