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“जब तक यह बमतुल बुखारा मेरे पास है किसने मां का दूध पिया है जो मुझे जीवित पकड़ ले जाए” ये शब्द थें चंद्रशेखर आजाद के, जिन्होने अंग्रजों के हाथों कभी भी जीवित गिरफ्तार न होने की प्रतिज्ञा ले रखी थीं। हुआ भी कुछ ऐसा ही जब अंग्रेजो से आखिरी मुठभेड़ में मरते दम तक फिरंगियों के छक्के छुड़ाने के बाद अपनी पिस्तल से खुद ही मौत को गले लगा लिया। इस तरह से आजादी की लड़ाई में चन्द्रशेखर आजाद की सच्ची साथी बनी उनकी पिस्टल, जिसे वो ‘बमतुल बुखारा’ कहते थें। आज चन्द्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस के अवसर के मौके पर हम आपको उनकी इसी पिस्टल के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कि आजकल इलाहाबाद की म्यूजियम में रखी गई है।
जी हां, देश जहां इस वक्त भारतीय वायु सेना द्वारा पाक में की गई कार्यवाही का जश्न मना रहा है, वहीं आज का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि 1931 में आज के दिन 27 फरवरी को आजादी के दिवाने चन्द्रशेखर आजाद अंग्रेजो से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। गौरतलब है कि देश की आजादी के 70 साल बीतने के बाद भी क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का क्रेज युवाओं में सबसे अधिक है। उनसे जुड़ी हर बात आज भी युवाओं को प्रेरित करती है। उनकी कोल्ट पिस्टल आज इलाहाबाद के म्यूजियम की शोभा बन चुका है।
बात करें उस ऐतिहासिक दिन की जब 27 फरवरी 1931 को इलाबाबाद के अल्फ्रेड पार्क ( जो आज आजाद पार्क के नाम से जानी जाती है) में चंद्रशेखर आजाद को अंग्रेजो ने चारों तरफ से घेर लिया था, तभी आजाद ने इसी पिस्टल से फायरिंग कर अंग्रेजी सिपाहियों को मुहतोड़ जवाब दिया और फिर आखिर में उसी पिस्टल से खुद को गोली मार मौत को गले लगा लिया।
हालांकि आजाद की मौत के बाद अंग्रेज पुलिस अफसर जॉन नॉट बावर ने उस पिस्टल को जब्त कर लिया था। पर आजादी के बाद जब भारत सरकार की तरफ से मांग हुई तो यह पिस्टल वापस इंडिया को सौंप दी गई थी। फिलहाल ये इलाहाबाद म्यूजियम में सुरक्षित रखी गई है, जहां लोग इस एक झलक पाने के लिए बेताब होकर आते हैं।
ये है इस पिस्टल की खासियत
आजाद की इस पिस्टल के बारे में बात करें तो प्वाइंट 32 एसीपी की यह पिस्टल हैमरलेस सेमी आटोमेटिक है। इसमें आठ बुलेट की मैगजीन है। इसे 1903 में अमेरिकन फायर आर्म्स बनाने वाली कोल्ट्स मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी ने बनाई थी। फिलहाल ये कंपनी कोल्ट पेटेंट फायर आर्म्स मैन्यूफैक्चरिंग के नाम से जानी जाती है।
Author: Yashodhara Virodai
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