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महाशिवरात्रि का त्यौहार आगामी 4 मार्च को देशभर में मनाया जायेगा। इस बार की महा शिवरात्रि बेहद ख़ास होने वाली है। जी हाँ, आपको बता दें कि चार दिन बाद आने वाली इस महा शिवरात्रि को कई सारे शुभ योग एक साथ पड़ रहे हैं। हम आपको इन शुभ योगों के बारे में बताएँगे, लेकिन उससे पहले आपका यह जानना बहुत ज़रूरी है, कि कश्मीर शैव मत में महा शिवरात्रि के त्यौहार को हर-रात्रि और बोलचाल में 'हेराथ' या 'हेरथ' भी कहा जाता है। शिवरात्रि का यह त्यौहार फाल्गुन महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है।
महा शिवरात्रि के त्यौहार को मनाये जे के पीछे कई सारे विद्वानों के अलग-अलग मत हैं। ऐसा माना जाता है कि सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ थआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ था। अधिकतर लोग यह मान्यता रखते हैं, कि इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था।
इतना ही नहीं कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि समुद्र मंथन के बाद भगवान शिव ने समुद्र से निकले बेहद ख़तरनाक कालकूट नामक विष को अपने कंठ में रख लिया था, जिससे उनका गला बहुत नीला हो गया था। इसी कारण से भगवान शिव का नाम नीलकंठ भी पड़ा। इस प्रकार, शिवरात्रि इस घटना का भी उत्सव है, जिससे शिव ने दुनिया को बचाया था। तब से इस दिन शिव के भक्त उपवास करते हैं, भगवान की महिमा गाते हैं और पूरी रात ध्यान करते हैं। यानी कि बिल्कुल साफ है कि महा शिवरात्रि का त्यौहार मनाये जाने के पीछे कई सारे मत प्रचलिक हैं।
आपको बता दें कि महाशिवरात्रि इस बार भगवान शिव के प्रिय दिन सोमवार और अति प्रिय श्रवण नक्षत्र में पड़ रही है। ऐसे में यह एक बेहद अनोखा और शुभ योग है, जिसमें भगवान शिव का रूद्राभिषेक करने से सभी तरह की मनोकामनाएँ पूरी हो जाती हैं।
Author: Amit Rajpoot
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