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वर्क कल्चर की बात करें तो आज कल हर किसी को काफी स्ट्रेस झेलना पड़ता है। क्योंकि कुछ भी पाने के लिए आपको महनत करनी पड़ती है। फिर इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अपना ख्याल रखना आसान काम नहीं है। अपने आपको टाइम देना होता है और साथ ही कुछ सुकून का टाइम चाहिये होता है जो आप अपने आप को दे सकें। ऐसा आमुमन नहीं होता है, हर कोई अपने आपको टाइम नहीं दे पाता है। अपने लिए सुकून ढूंडना आसान नहीं है आपको बता दें एक हाल ही में हुई एक स्टडी के मुताबिक पुरुषों के मुकबले महिलाओं को आराम की ज़्यादा ज़रूरत होती है।
हाल ही में एक स्टडी सामने आयी है जिसमें पाया गया है कि जो महिलाएं दिन में 9 स्टेंडर्ड घंटों से ज्यादा काम करती हैं उनके डिप्रेशन में जाने के चांस काफी ज़्यादा होते हैं पुरुषों के मुकाबले। मतलब साफ है क्योंकि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा काम करती हैं और उनसे ज़्यादा काम करने की क्षमता रखती हैं।
देखने वाली बात तो ये है कि ये स्टडी सिर्फ लोगो के स्वभाव पर और उनकी आदतों पर आधारित थी। जिसमें पता चला है कि 35-40 घंटे काम करने वाली महिलाओं के मुकाबले 55 घंटे काम करने वाली महिलाओं को डिप्रेशन होने के ज़्यादा लक्षण होते हैं।
इसी के विपरीत बात करें पुरुषों कि तो इनमें किसी भी तरह के स्ट्रेस और डिप्रेशन के प्रमाण नहीं पाए गये और इतना काम करने के बाद भी वो काफी स्वस्थ रहते हैं और बिना थके काम कर सकते हैं।
Author- Anida Saifi
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