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महाशिवरात्रि की रात को भगवान शंकर के रूद्राभिषेक का विशेष विधान होता है। इसमें भगवान शिव की कुछ विशेष विधियों के साथ पूजा की जाती है और इसके साथ ही दूध और चंदन के साथ उनका अभिषेक किया जाता है। आपको बता दें कि वैसे तो भगवान शंकर को चढ़ाव के रूप में शिवरात्रि के दिन कई सारी वस्तुएँ अर्पित की जाती है, जिससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। इन वस्तुओं में भाँग, धतूरे, गाँजा, चने की हरी फलियाँ, जौ की कलियाँ, बेर, मदार के फूल, आम के बौर, आम की टेरी और बेल पत्र आदि विशेष रूप से शामिल की जाती हैं।
लेकिन आपको बता दें कि 5 ऐसी भी चीज़ें हैं, जिन्हें भगवान शिव को अर्पित करने से आपकी पूजा खण्डित हो जायेगी और इसका बुरा फल मिलेगा। इसलिए रात में भगवान शिव की आराधना से पहले आइए जानते हैं कि वो 5 ऐसी कौन सी चीज़ें हैं, जिन्हें भगवान शंकर को नहीं अर्पित करना चाहिए।
1. सिन्दूर या कुमकुमः
सिन्दूर या कुमकुम को स्त्रियों का सबसे अहम प्रतीक समझा जाता है, जिसके माध्यम से वह अपने पति के जीवंत होने का प्रतीक दर्शाती हैं, वहीं शिव विनाशक माने जाते हैं। इसलिए महा शिवरात्रि के दिन और वैसे भी भगवान शंकर को सिन्दूर या कुमकुम नहीं लगाया जाता है।
2. तुलसी की पत्तीः
भगवान शंकर ने तुलसी यानी की वृंदा के पति असुर जालंघर का वध किया था। इसलिए किसी स्त्री से उसके पति के हत्यारे का मिलन ख़तरनाक माना जाता है। ऐसे में तुलसी की पत्ती भले ही कितनी पवित्र हो, लेकिन शिव के संपर्क में आने पर वह विनाश कर सकती है।
3. केतकी के फूलः
पौराणिक कथा है कि एक बार ब्रह्मा के किसी ढूठ पर केतकी के फूल ने उनका साथ दिया था, जिससे भगवान शंकर ने केतकी के फूल को श्राप दिया था कि आज के बाद तुझे शिवलिंग पर नहीं अर्पित किया जायेगा। ऐसा करने से भगवान शिव नाराज़ होते हैं।
4. हल्दीः
हल्दी को स्त्रियोचित माना जाता है, इसलिए महा शिवरात्रि के दिन भगवान शंकर के ऊपर हल्दी को अर्पित करने से उन्हें यह बुरा लगता है। आपको बता दे कि शिव के अलावा सभी देवी-देवताओं के लिए हल्दी बेहद पवित्र और शुभ माना जाता है।
5. शंख से जलार्पणः
शंखचूड़ नाम के राक्षस का भगवान शंकर ने वध किया था, जिसके बाद उसका शरीर भस्म हो गया। उसी भस्म से शंख की उत्पत्ति हुई थी। शिवजी ने शंखचूड़ का वध किया, इसलिए कभी भी शंख से शिवजी को जल अर्पित नहीं किया जाता है।
Author: Amit Rajpoot
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