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भारत की पहली राजधानी एक्सप्रेस नई दिल्ली से चलकर कोलकाता के हावड़ा शहर तक पहली बार साल 1969 में चलाई गयी थी। इस राजधानी एक्सप्रेस का नाम कोलकाता राजधानी एक्सप्रेस है, जो कभी भारत की राजधानी रहे कलकत्ता शहर को देश की नई राजधानी नई दिल्ली से जोड़ती है। आपको बता दें कि इस साल दिल्ली-कोलकाता राजधानी एक्सप्रेस ने अपने 50 साल पूरे कर लिये हैं, इसीलिए साल 2019 में दिल्ली-कोलकाता राजधानी एक्सप्रेस का गोल्डन जुबली साल मनाया जा रहा है। ग़ौरतलब है कि साठ के दशक में भारत सरकार के रेल मंत्रालय ने रेल यात्रा में स्पीड और लग्ज़री के तरीक़े में क्रान्ति लाने की सोची थी। इसी का परिणाम उन्हें 3 मार्च, 1969 को दिल्ली-कोलकाता राजधानी एक्सप्रेस के रूप में मिला और देश पहली राजधानी एक्सप्रेस पाकर ख़ुश हुआ था।
आपको बता दें कि दिल्ली-कोलकाता राजधानी एक्सप्रेस के द्वारा पहली बार 3 मार्च, 1969 को कोलकाता के हावड़ा शहर से पहली यात्रा रवाना हुयी थी। यह देश की पहली पूर्ण वातानुकूलित उच्चगतिशील ट्रेन है, जिसने पहली बार 17 घण्टे और 20 मिनट में 1,450 किमी. की लंबी दूरी तय की थी। दिल्ली-कोलकाता राजधानी एक्सप्रेस में ही पहली बार यात्रियों के टिकट में ही उनके भोजन शुल्क को भी शामिल किया गया था और फिर उन्हें रास्ते में वो भोजन परोसा जाता था।
दिल्ली-कोलकाता राजधानी एक्सप्रेस अपनी शुरुआत में डीज़ल इंजन से चला करती थी, लेकिन इसके बाद इसे बिजली के सहारे सरपट दौड़ाया गया। शुरू में इसमें नौ वैक्यूम ब्रेक कोच लगाए जाते थे, जिसमें दो पावर कार कोच, पांच एसी चेयर कार, एक एसी डायनिग कार और एक फ‌र्स्ट एसी कोच होता था।
इस ट्रेन की रफ़्तार 130 किलोमीटर प्रति घण्टा है, जिसे 1 नवंबर, 1971 को बढ़ाया गया था। इससे पहले दिल्ली-कोलकाता राजधानी एक्सप्रेस की अधिकतम रफ़्तार 120 किमी. प्रति घंटे थी। इसके अलावा 1 अप्रैल, 1983 से यह सप्ताह में चार दिन चलने लगी। इसके ठीक 3 साल बाद 1 अप्रैल, 1986 से इसके फेरे बढ़ाकर सप्ताह में पांच दिन कर दिया गया।
Author: Amit Rajpoot
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