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दुनिया में आपको अलग अलग तरह की नयी चीज़ें मिल जाएंगी। आपको बता दें कि भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में लोगों के लिए एक चलती फिरती लाइब्रेरी थी। देखने वाली बात तो ये है कि इस लाइब्रेरी का हाल ही में देहांत हो गया है।
जी हां, आपको बता दें कि बांग्लादेश के एक पिछड़े हुए शहर में एक व्यक्ति रहता था जिसका नाम था पोलन सरकार। जब वो छोटा था तब उसके पिता की मृत्यु हो गयी थी। इसके बाद पोलन ने पैसों की तंगी की वजह से अपनी पढ़ाई छोड़ दी, लेकिन इसी दौरान उसने एक प्रण भी लिया कि इसके गांव का कोई भी व्यक्ति अनपढ़ नहीं रहेगा। इसके बाद पोलन ने लोगों को घर-घर जाकर किताबें देना शुरू कर दिया जिसके चलते लोग पढ़ाई करने लगे।
पोलन बांगलादेश का एक सोशल एक्टिविस्ट था और इसी के साथ बांग्लादेश सरकार की तरफ से पोलन को ‘एकोशे पदक’ भी मिल चुका है, जो बांग्लादेश के नागरिकों के लिए सबसे बड़ी उपाधि मानी जाती है। पोलन का जन्म 9 सितंबर को नाटौर के बागाटिपारा में हुआ था। पोलन के इसी काम के चलते वहां के लोगों ने इनको ‘अलोर फेरिवाले’ का लकब दिया था जिसका मतलब होता है ‘ज्ञान की रोशनी बांटने वाला’।
1990 में पोलन को डाइबिटीज़ की बीमारी हो गयी थी। इसके बाद डॉक्टर ने पोलन को ज़्यादा से ज़्यादा चलने फिरने की सलाह दी। पोलन फिर निकल पड़े अपना काम पूरा करने। डायबिटीज़ का इलाज करने के साथ-साथ लोगों के लिए लाइब्रेरी भी बने थे। गौरतलब है कि लोगों इस तरह से शिक्षा का पाठ पढ़ाने के बाद अब वो इस दुनिया को अलविद कह चुके हैं।
Author- Anida Saifi
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