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इस साल हम 108वां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस बैलेंस फॉर बेटर के थीम के साथ मना रहे हैं। जाहिर समाज में समानता तभी आएगी जब महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिले... हर क्षेत्र में उन्हें पुरूषों के समान अवसर मिलें। हालांकि सिर्फ समान अधिकारों से बात नहीं बनेगी, बल्कि आधी आबादी की सहूलियत और तरक्की के लिए जरूरत है कि महिलाओं को कुछ खास अधिकार मिलें। वैसे भारत के कानून में महिलाओं को कुछ खास अधिकार मिले भी हुए हैं और आज हम आपको उसी के बारे में बताने जा रहे हैं।
1. समान वेतन का अधिकार
1976 में पारित हुए समान पारिश्रमिक अधिनियम के अनुसार, लिंग के आधार पर वेतन में किसी के साथ भी भेदभाव नहीं किया जा सकता।यानी कि एक महिला को पुरूष के सामन वेतन का अधिकार प्राप्त है।
2. गोपनीयता का अधिकार
महिलाओं की गरिमा को ध्यान में रखते हुए उन्हे अपनी गोपनीयता बनाए रखने का पूरा अधिकार है। जैसे कि यौन पीड़िताओं को अपने नाम की गोपनीयता बनाए रखने का पूरा आधिकार है। दरअसल, कई बार ऐसी पीड़ित महिलाएं अपने नाम उजागर होने के डर से अपने साथ हुए वारदात के बारे में नहीं बताती हैं। इसलिए ने ये नियम लागू किया ताकि अगर कोई ऐसी पीड़ित महिलाओं के मर्जी के विरुद्ध उनका नाम उजागर करता है, तो उसके खिलाफ कायवाही हो। महिला, को अधिकार है कि वो किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में या फिर जिलाधिकारी के सामने अपना मामला दर्ज करा सकती है।
3. कार्यस्थल पर हुए उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार
कार्यस्थल पर बढ़ते यौन उत्पीड़न के मामलों को देखते हुए ये कानून बनाया गया है, जिसके तहत किसी भी वर्किंग महिला को वर्क प्लेस पर हुए यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का पूरा अधिकार है। वहीं जांच लंबित रहने की स्थिति में 90 दिन की पेड लीव दिए जाने का भी पआवधान है।
4. घरेलू हिंसा के प्रतिरोध के लिए कानून
जी हां, 2005 में पारित घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत अगर कोई महिला अपने पति या पति के परिवारवालों से किसी तरह से प्रताड़ित है, तो वो घरेलू हिंसा रोकथाम कानून के तहत शिकायत दर्ज करा सकती है या उसकी तरफ से कोई भी हिंसा की शिकायत दर्ज करा सकता है।
5. मातृत्व अवकाश का अधिकार
1961 में पारित मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत कामकाजी महिलाओं को मैटरनिटी बेनिफिट्स दिए जाने का प्रावधान है। इसके तहत गर्भवती महिला 26 सप्ताह तक मैटरनिटी लीव ले सकती है और इसके लिए सैलरी से कोई कटौती नहीं की जाती है।
6. जीने का अधिकार- कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार
जी हां, देश में हो रहे कन्या भ्रूण हत्या को देखते हुए प्रसव से पूर्व लिगं की पहचान करने की तकनीक पर रोक लगाने के लिए अधिनियम (PCPNDT) पारित किया गया। ताकि हर बच्ची को जीने का अधिकार मिल सके।
7. मुफ्त कानूनी मदद का अधिकार
जी हां, देश का कानून बलात्कार पीड़ित हर महिला को मुफ्त कानूनी मदद पाने का अधिकार देता है। इसके तहत पुलिस थानाध्यक्ष को जिम्मेदारी दी गई है कि वो विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिए वकील की व्यवस्था करे।
8. पिता की संपत्ति में बेटी का अधिकार
जी हां, भारत का कानून पिता की संपत्ति में बेटी का बेटे के बराबर अधिकार देता है। इसके तहत अगर पिता ने खुद अपनी संपति की कोई वसीयत नहीं बनाई है तो उनकी मौत के बाद बेटी को उस संपत्ति में भाइयों और मां के जितना ही हिस्सा मिलेगा।
9. पति की संपत्ति में अधिकार
वैसे तो पति की संपत्ति में तो महिला का कोई मालिकाना हक नहीं होता, पर वैवाहिक विवाद और समबन्ध विच्छेट की स्थिति में महिला को पति की हैसियत के हिसाब से गुजारा भत्ता मिलने का प्रावधान है। वहीं पति की मौत के बाद उसकी अर्जित की गई सम्पत्ति में से महिला को हिस्सा मिलने का प्रावधान है।
10. नहीं हो सकती रात में किसी महिला की गिरफ्तारी
जी हां, भारतीय कानून के अनुसार सूरज डूबने के बाद और सूरज उगने से पहले किसी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। सिर्फ किसी खास मामले में मजिस्ट्रेट के आदेश पर ऐसा संभव है।
Author: Yashodhara Virodai
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