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महिला दिवस आज पूरी दुनियाभर में बड़े धूम-धाम के साथ मनाया जा रहा है। इस मौक़े पर महिलाओं के सशक्त होने की कहानियाँ बाची जाती हैं और आगे के लिए प्रतिबद्धता जताई जाती है कि उन्हें अभी कितना आसमान और छूना है। आपको बता दें कि महिलाओं के लिए यह सब तबी संभव हो पायेगा, जबकि उनका स्वास्थ्य सामान्य अथवा बेहतर होगा। लेकिन ये जानना बड़ा दुःखद है कि महिलाओं के स्वास्थ्य के आँकड़े न सिर्फ़ भारत में बल्कि दुनिया के हर कोने में काफी निम्न हैं। ऐसे में भला महिलाएँ कैसे अपना जीवन बेहतर बना सकती हैं? इसलिए महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं से जुड़े स्वास्थ्य के बारे में बात करना बेहद ज़रूरी हो जाता है। आइए आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के बेहद ख़ास मौक़े पर आपको महिलाओं की सेहत पर मंडराने वाले 4 बड़े ख़तरों के बारे में बताते हैं।
1. ब्रेस्ट कैंसरः
भारत की हर 8वीं महिला ब्रेस्ट कैंसर की गिरफ़्त में है। वैज्ञानिकों का दावा है कि ये आँकड़ा और भी तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। मतलब साफ है कि ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं में इज़ाफ़ा हो रहा है। चिन्ता की बात तो यह भी है कि महिलाओं की उम्र बढ़ने के साथ-साथ उनमें ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा और भी बढ़ता जाता है। इसके कई कारण हैं, जैसे महिलाओं का खानपान और अनुवांशिकी आदि।
2. मासिक-धर्म से जुड़ी समस्याः
महिलाओं में मासिक-धर्म यानी कि पीरियड्स से जुड़ी समस्या बेहद आम लेकिन बड़ी समस्या है। इस दौरान महिलाओं को कई तरह की मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों की अज्ञानता और शर्म इसे और भी ख़रनाक बना देती है। इसलिए महिलाओं को स्वयं इस ख़तरे को दूर करने के लिए प्रयास करना चाहिए और पीरियड्स से जुड़े हर आम और ख़ास समले पर बेझिझक बिंदास होकर हर किसी से बात करनी चाहिए।
3. सर्वाइकल कैंसरः
महिलाओं में कैंसर से हुयी मौतों का सबसे बड़ा कारण सर्वाइकल कैंसर ही होता है। एक अध्ययन के मुताबिक पूरी दुनिया में हर साल 5 लाख सर्वाइकल कैंसर के मामले सामने आते हैं, जिनमें 27 फीसदी हिस्सा भारतीय महिलाओं का ही होता है।
4. पोस्टनेटल डिप्रेशनः
महिलाओं में डिलवरी के वक़्त होने वाली समस्या से तो वह गुजर जाती हैं, हालाँकि आजकल उसमें भी उन्हें बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है। आपको बता दें कि महिलाओं में डिलवरी के बाद होने वाला दर्द सबसे ख़तरनाक है। जी हाँ, डिलवरी के बाद महिलाओं का सबसे अधिक ख़्याल रखा जाना चाहिए, वरना उन्हें ख़ासा दिक्कत हो सकती है।
Author: Amit Rajpoot
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