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गर्भावस्था से संबंधित कैंसर का इलाज प्रसव के एक साल बाद किया जाता है। हालांकि खराब स्थिति में मरीज के परिजन अक्सर गर्भपात की सलाह देते हैं। गोरेगांव स्थित सॉफ्टवेयर इंजीनियर शिखा खंडेलवाल को अपनी पहली गर्भावस्था के छठे महीने में थर्ड स्टेज के स्तन कैंसर का पता चला था। निदान के महीनों पहले उसने एक गांठ पर ध्यान दिया लेकिन उसके स्त्री रोग विशेषज्ञ ने इसे हार्मोनल परिवर्तन के रूप में खारिज कर दिया।
खंडेलवाल गर्भावस्था से जुड़े कैंसर या पीएसी के साथ भारतीय महिलाओं की बढ़ती संख्याओं में से एक हैं। इस संबंध में पहली बार परेल में टाटा मेमोरियल हॉस्पिटलके डॉक्टर पीएसी को समझने की कोशिश कर रहे हैं और डेटा एकत्र कर रहे हैं ताकि वे उपचार के बारे में दिशानिर्देश निर्धारित कर सकें। इस दौरान डॉक्टर गर्भावस्था से जुड़े स्तन कैंसर पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो भारतीय महिलाओं में सबसे आम है।
इस संबंध में अस्पताल में चिकित्सा ऑन्कोलॉजी की प्रोफेसर डॉ. ज्योति बाजपेयी ने कहा "हम जानते हैं कि लगभग एक तिहाई भारतीय महिलाओं को उनके तीसवें दशक में स्तन कैंसर का पता चलता है और अब देर से गर्भधारण की प्रवृत्ति के कारण महिलाओं को इस बीमारी का पता चलता है।" यह एक ज्ञात तथ्य है कि देर से गर्भधारण कैंसर के लिए जोखिम कारक हैं, जबकि प्रारंभिक गर्भधारण सुरक्षात्मक हैं।"
इस शोध में अब तक 80 महिलाओं को रजिस्टर्ड किया जा चुका है। डॉ. बाजपेयी और उनकी टीम निर्धारित अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के आधार पर उनका इलाज कर रही है।
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