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जी हां, जैसा कि रविवार को चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही देशभर में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो चुकी है। हालांकि देश में बहुत से ऐसे लोग हैं जो कि आचार संहिता के बारे में सही से नहीं जानते, अगर कुछ जानते हैं तो वो भी अखबारों या न्यूज चैनलों पर खबरों के जरिए कि आचार संहिता लग गई है। लेकिन असल में आचार संहिता क्या है इसकी सही जानकारी लोगों को नहीं है। ऐसे में हम आपको आसान लहजे में ये बताने जा रहे हैं कि वास्तव में आचार संहिता क्या होती है और इसके लागू होने के बाद क्या बदलाव होते हैं।
असल में, चुनाव आचार संहिता, चुनाव आयोग के वे निर्देश हैं, जिनका अनुसरण चुनाव खत्म होने राजनीतिक दलों के साथ शासन और प्रशासन हो करना होता है। चलिए सबसे पहले बात करते हैं राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी आचार संहिता का क्या मतलब होता है...
राजनीतिक दल के लिए चुनावी आचार संहिता
राजनीतिक दल, मतदताओं को लुभाने के लिए कोई भी ऐसा काम न करे, जिससे जाति और धर्म या भाषा के आधार पर सम्प्रदायिक माहौल तैयार हो।
राजनीतिक पार्टियों, अपने प्रतिद्वंदी उम्मीदवारो या पार्टियों की आलोचना सिर्फ उनके काम और नीतियो के आधार पर कर सकती है, ना कि व्यक्तिगत के आधार पर।
कोई राजनेता या उम्मीदवार मतदाताओं को लुभाने के लिए रिश्वत या कोई प्रोलभन देते हुए पकड़े जाता है तो उसके खिलाफ चुनाव आयोग कार्रवाई कर सकती है।
राजनीतिक दल किसी भी बैठक या सभा के लिए सबसे पहले उस इलाके के स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इसकी पूरी जानकारी देनी होगी, ताकि वो वहां सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम कर सकें।
वहीं अगर दो या उससे अधिक पार्टियां एक ही जगह, एक ही रुट में चुनाव प्रचार करती हैं, तो दोनो पार्टियों के आयोजनकर्ताओं को संपर्क कर ये तय करना होगा कि वे आपस में क्लैश ना करें।
सत्ताधारी पार्टी के लिए आचार संहिता
सत्ताधारी दल के कोई भी मंत्री किसी भी तरह का आधिकारिक दौरा नहीं कर सकता और ना ही अपने किसी सरकारी कार्य का चुनावी प्रचार । सत्ताधारी पार्टी के लिए लोक लुभावने वादों की भी मनाही होती है। साथ ही किसी सार्वजनिक स्थानों पर सत्ताधारी पार्टी का किसी तरह का एकाधिकार नहीं होगा।
कोई भी मंत्री न तो कोई घोषणा कर सकता है और ना शिलान्यास, लोकार्पण या भूमिपूजन जैसे कार्यक्रम।
प्रशासन के लिए आचार संहिता
चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक सरकारी कर्मचारी, निर्वाचन आयोग के कर्मचारी बन जाते हैं और आयोग के दिशा-निर्देश पर काम करते हैं।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने देश में 17वें लोकसभा चुनाव की घोषणी कर दी है, जिसके अनुसार देशभर में 7 चरणों में 11 अप्रैल से 19 मई तक चुनाव होने है और इसके बाद 23 मई को मतगणना होगी।
Author: Yashodhara Virodai
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