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स्लिप डिस्क पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए एक भयंकर समस्या है। ये आज के दौर की भागदौड़ वाली ज़िन्दगी में और भी आम समस्या बन गयी है। आपको बता दें कि स्लिप डिस्क रीढ़ की हड्डियों में मौजूद कशेरुकाओं को सहारा देने के लिए छोटी-छोटी गद्देदार डिस्क होती हैं, जो रीढ़ की हड्डी को झटकों से बचाती और से लचीला बनाये रखती हैं। जब यह स्लिप डिस्क किसी भी तरह क्षतिग्रस्त होकर सूजन से भर जाती है अथवा कभी-कभी टूट कर ख़ुल जाती है, तो इसे स्लिप डिस्क की समस्या कहते हैं। स्लिप डिस्क से हाथ अथवा पैर में कमज़ोरी का आना इसका लक्षण बताता है। आपको बता दें कि स्लिप डिस्क तीन तरह की हो सकती है। पहली, सर्वाइकल स्लिप डिस्क। दूसरी, थोरैसिक स्लिप डिस्क और तीसरी, लंबर स्लिप डिस्क।
बहरहाल स्लिप डिस्क को दुरुस्त करने के लिए कई सारे तरीक़े लोग अपनाते हैं, लेकिन इसमें कपिंग थेरेपी सेस बेहतर कुछ बी नहीं है। जी हाँ, आपको बता दें कि आयुर्वेद न्यूरो पंचकर्म कपिंग थेरेपी के द्वारा स्लिप डिस्क को न सिर्फ़ आसानी से ख़त्म किया जा सकता है बल्कि ये रीढ़ की हड्डियों में मौजूद कशेरुकाओं की कसरत भी करा देता है, जिससे कि हम पहले से अधिक स्फूर्तिमय महसूस करते हैं।
कपिंग थेरेपी में दवा की ज़रूरत नहीं होती है। सालों पुरानी ये पद्यति स्लिप डिस्क के अलावा भी अन्य कई तरह की बीमारियों में लाभकारी है। यह थेरेपी काफी पुरानी है, जिसमें शरीर में हुये रक्त के असंतुलन से उपजी परेशानी को सही किया जाता है। इसके लिए गर्दन के नीचे से लेकर गुदा तक बीमारी के अनुकूल प्वाइंट्स को चिह्नित किया जाता है और वहाँ काँच के कप से शरीर को ढककर वैक्यूम पैदा किया जाता है। बहरहाल कपिंग थेरोपी काफी प्राचीन होने के साथ बिना रिस्क के होनेवाली चिकित्सा पद्यति है। इसे हिजामा थेरेपी के नाम से भी जाना जाता है।
Author: Amit Rajpoot
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