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भारत में ऐसे बहुत से गायक और संगीतकार हुए हैं, जिन्होने अपनी कला से पूरी दुनिया को दिवाना बनाया है। आज ऐसे ही सिंगर का जन्मदिन होता है, जिनकी देसी आवाज के विदेशी भी दिवाने हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं, अपनी सुरीली आवाज से सबको दिवाना बनाने वाली गायिका श्रेया घोषाल की।
1984 में 12 मार्च को एक बंगाली परिवार में जन्मी श्रेया आज बॉलीवुड पर राज करती हैं। इस गायिका के नाम ऐसी उपलब्धियां दर्ज हैं, जो कि लता मंगेशकर, आशा भोसले, अलका याज्ञनिक जैसे दिग्गज सिंगर्स के नाम भी नहीं हैं। आज श्रेया के जन्मदिन के मौके पर हम उनकी जिंदगी के कुछ ऐसे रोचक तथ्यों के बारे में बता रहे हैं।
बॉलीवुड के लिए संजय लीला भंसाली की खोज हैं श्रेया
जी हां, श्रेया को बॉलीवुड में पहला मौका देने वाले संजय लीला भंसाली हैं। दरअसल, ये वाक्या सन् 1996 का है जब टीवी पर सा, रे, गा, मा, पा’ शो आ रहा था, उस शो में प्रतिभागी के रूप में एक 11 साल की एक लड़की ने लता मंगेश्कर का गाना शुरू किया। उसका ये गाना सुनाई पड़ा बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर को। उस गाने के को सुन डायरेक्टर ने अपनी जान-पहचान के लोगों को फोन लगाया और कहा कि उस लड़की का पता करो, मेरी अगली फिल्म में वो ही गाना गाएगी।
दरअसल, वो डायरेक्टर थे संजयलीला भंसाली और वो 11 साल की लड़की थी श्रेया घोषाल। असल में, संजय लीला भंसाली ने श्रेया की आवाज सुन उन्हें अपनी क्लासिक देवदास के लिए सिलेक्ट किया था और यहां से शुरू हुआ श्रेया के गायिकी का सफर।
फिल्म देवदास में श्रेया ने ऐश्वर्या राय के लिए अपनी आवाज दी, जिसे सुन दुनिया श्रेया घोषाल की आवाज दिवानी हो गई, आलम ये हुआ कि इसके बाद महज कुछ ही समय में श्रेया बॉलीवुड में अलका याज्ञिक, सुनिधि चौहान और कविता कृष्णमूर्ति की श्रेणी की पार्श्व गायिक बन गयीं। फिल्म देवदास में गाए गाने ‘बेरी पिया’ के लिए उन्हें उस साल का सर्वश्रेष्ठ गायिका का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिला। वैसे श्रेया के लिए फिल्म देवदास से पुरुस्कारों का ये सिलसिला जो शुरू हुआ वो आज भी जारी है, आज के समय में श्रेया घोषाल को चार फिल्मफेयर अवार्ड, चार नेशनल फिल्म अवॉर्ड और दो साउथ फिल्मफेयर अवॉर्ड मिल चुके हैं।
पहली भारतीय गायिका जिसका वैक्स स्टैचू मैडम तुसाद के संग्रहालय में रखा है
जी हां, श्रेया घोषाल पहली ऐसी भारतीय गायिका हैं, जिनका मोम का पुतले मैडम तुसाद के संग्रहालय में लगाया गया है।
अमेरिका में मनाया जाता है श्रेया घोषाल डे
जी हां, श्रेया की सुरीली आवाज का जादू विदेशों भी कायम है। दरअसल, 2010 में जब श्रेया एक कार्यक्रम के लिए अमेरिका के ओहायो सिटी पहुंची थी, तो वहां लोगों में उनके लिए असीम प्यार देख, वहां के मौजूदा गवर्नर ने श्रेया के नाम से एक दिन सेलिब्रेट करने की घोषणा कर दी। तभी से 26 जून के दिन हर साल अमेरिकन सिटी ओहायो में श्रेया घोषाल डे मनाया जाता है।
Author: Yashodhara Virodai
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