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देश के जम्मू-कश्मीर की हालत किसी से छिपी नहीं हुई है कि, किस कदर ये यहां के लोग आतंक के साए में जीने को मजबूर हैं। लेकिन वहीं यहां के पुंछ जिले में एक ऐसा भी गांव है जो आतंकियों से नहीं बल्कि आतंकी वहां के लोगों से डरते हैं। जी हां... और ये सब कुछ हो सका है वहां की महिलाओं के कारण। दरअसल, हम बात कर रहे हैं जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में बसे गांव मोहरा कला की, जहां कभी आतंकियों का खौफ पसरा रहता था। पर आज आतंकी यहां आने की सोचने से भी डरते हैं, क्योंकि इस गांव की निगहबानी खुद यहां महिलाएं करती हैं।
नियंत्रण रेखा से महज 60 किलोमीटर दूर बसा ये गांव दो दशक पहले आतंकियों का आसान निशाना था, आतंकी यहां के लोगों को अपने अधीन बनाकार उनसे राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में मदद चाहते थें। पर गुज्जर समुदाय के यहां के लोगो को देश से गद्दारी किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं थी और ग्रामीणों का ये इनकार आतंकियों को नहीं सुहाया। ऐसे में साल 2001 में आतंकियों ने इस गांव के लगभग 18 लोगों को मौत के घाट उतार दिया । मरने वाले में ज्यादातर बुजुर्ग और बच्चे थे। ऐसे घर की महिलाओं ने अपनी और गांव की सुरक्षा का बीड़ा उठाया।
गांव की महिलाओं ने अपनी और गांव की अस्मिता के लिए बन्दूक उठा लिया और इसमें उन्हें मिली सेना की मदद। दरअसल, साल 2005 में सेना ने आतंकियों के खिलाफ 'सर्प विनाश' अभियान चलाया और छह माह के भीतर इस गांव को आतंकियों से मुक्त करा लिया। पर इसके सेना के आगे चुनौती थी, इस गांव को आतंक के साए से हमेशा के लिए दुर रखना। इसके लिए सेना ने गांव की महिलाओं को चुना और उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी।
असल में पीरपंजाल की पहाड़ी श्रंखला पर बसा ये गांव बर्फबारी के कारण नवंबर से अप्रैल तक राज्य के दूसरे इलाकों से कट जाता है। यहां पर लगभग आठ फीट तक ऊंची बर्फ जमती है। ऐसे में यहां गुज्जर समुदाय के चारागाह की तलाश में मवेशियों को लेकर मैदानी इलाकों में निकल जाते है और घरों में बच जाती हैं महिलाएं। यही समय आतकिंयों के अतिक्रमण का होता है। इसलिए सेना ने सबसे पहले गांव की महिलाओं को सैन्य प्रशिक्षण देने की सोची।
इसके लिए गांव में महिलाओं के दल क्षेत्र के हिसाब से बांटे गए हैं और टोली को अपने क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई। महिलाओं को अपनी इफाजत के लिए राइफलें दी गई साथ ही दल की सभी सदस्य एके-47, एके-56 के अलावा अन्य आधुनिक हथियार भी चलाना जानती हैं।वैसे आतंक के खिलाफ महिलाओं के इस संकल्प में यहां पुरुष भी कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे है और गांव के लोगों की ये एकजुटता ही आतंकियों के दिल में डर का सबसे बड़ा सबब साबित हुआ है।
लगभग 20 किमी के दायरे में फैले हुए ये गांव जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी ग्राम सुरक्षा समिति हैं, जिसके 180 सदस्यों में 100 महिलाएं हैं। सेना ने गांव की महिलाओं के सहयोग से गांव का पुनर्वास भी किया है । यहां सड़क, पानी और बिजली जैसी जरूरी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
Author: Yashodhara Virodai
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