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ये तो हम सब महूसस करते हैं कि मौसम बदलते ही हमारे मूड में बदलाव होता है, पर क्या आप जानते हैं कि असल में इसके पीछे वैज्ञानिक कारण होता है। दरअसल, वैज्ञानिको की माने तो इंसानों का मूड का एक खास पैटर्न होता है जो हर महीने के अनुसार से बदलता रहता है। असल में इस विष्य में शोधकर्ताओं ने पाया है कि स्तनधारियों (mammals) के मस्तिष्क में ऐसे कैलेंडर सेल्स होते हैं, जो बॉडी क्लॉक को तय करते हैं हैं और हार्मोन के स्तर के आधार पर बताते हैं कि कब शीतनिद्रा लेनी है या कब प्रजनन करना है। यानि कि आपकी मन-मस्तिष्क भी एक निश्चित संकेत के अनुसार चलता है और ऐसे में हर महिने आपके मूड में बदलाव जाहिर तौर पर होता है। जैसे कि...
जनवरी- नई पहल के लिए मिलती है प्रेरणा
जनवरी का महीना नई पहल की शुरुआत के लिए बेहतर होता है। दरअसल, वैज्ञानिकों की माने तो सर्दियों के मौसम में इंसान का दिमाग सक्रिय और क्रीएटिव होता है। यहां तक कि मनोवैज्ञानिकों ने इसे टेम्पोरल लैंडमार्क टर्म दिया है।
फरवरी- सुलझेगी गुत्थी
जी हां, फरवरी को दिमाग के लिए सबसे बेहतर मौसम माना जाता है, क्योंकि इस मौसम में आप सबसे सही और विवेकपूर्ण ढंग से सोच पाते हैं। ऐसे में आपको दुविधाओं से मुक्ति मिलती है।
मार्च- सताती है उदासी
मार्च का महीना आपके लिए उदासी भरा होता है। वैज्ञानिकों की माने तो इसमें शरीर में विटामिन डी और दूसरे फील गुड केमिकल सेरोटोनिन और डोपामाइन का स्तर कम हो जाता है, जिससे उदासी और थकान उच्चतम स्तर पर होती है।
अप्रैल- बढ़ती है व्याकुलता
अप्रैल के महीने में आपके मन की व्याकुलता बढ़ जाती है यही वजह है कि इस वक्त में लोग तनाव से निपटने के सबसे अधिक उपाय ढूढ़ते हैं। दरअस, ये वो वक्त होता है, जब सूरज का प्रकाश तेजी से बढ़ रहा होता है जिससे इंसान के सर्कैडियन लय में बाधा पहुंचती है और व्यक्ति व्याकुल हो जाता है।
मई में होता है मस्ती का मूड
मई में मौसम भले ही गर्म होता है, पर सूर्य की अधिक रोशनी में चलते शरीर में विटामिन डी का उत्पादन बढ़ाता है। जिसके प्रतिक्रिया स्वरूप शरीर में सेरोटोनिन केमिकल पैदा होता है, जो व्यक्ति का मन खुश और शांत रखता है।
जून में हाय होता है जोश
जून के महीने में भी सेरोटोनिन केमिकल उच्च स्तर पर होने की वजह से काफी उत्साहित नजर आते है।
जुलाई होती है आनंद से भरपूर
जुलाई में तनाव पैदा करने वाला कोर्टिसोल हार्मोन सबसे कम स्तर पर होता है, ऐसे में व्यक्ति अधिस शांत और खुशहाल महसूस करता है।
अगस्त में सक्रियता बढ़ती है पर मन शांत रहता है
वहीं अगस्त के महीने में मस्तिष्क की सक्रियता उच्चतम स्तर पर होती है, पर वहीं मन शांत स्थिर है।
सितंबर- कार्यक्षमता में बेहतरी
जी हां, सिम्बर का महीना आपकी कार्यक्षमता बढ़ाता है। इस महीने में व्यक्ति की बढ़ती कार्य कुशलता का असर है कि दुनियाभर में इस महीने में सबसे अधिक उत्पादन होता है।
अक्टूबर बढ़ती है असुरक्षा की भावना
वैज्ञानिको की माने तो इस महीने व्यकित की ऊर्जा का स्तर घट जाता है जिससे उन्हे अकेलेपन महसूस होता है और फिर सुरक्षित महसूस करने के लिए हम किसी के साथी की तलाश करते हैं। यही वजह है कि अक्टूबर में सबसे अधिक प्रेम संबंध बनते हैं।
नवंबर है फिटनेस के लिए
जी हां, भले ही ये आम धारणा है कि सर्दिया आते ही आप खाने पीने पर अधिक ध्यान देने लगते हैं और नकतीजन आपका वजन बढ़ जाता है। पर वैज्ञानिको की माने तो ये मौसम वजन कम करने के लिए औप फिटनेस के लिए सबसे अच्छा होता है।
दिसंबर लाता है डिप्रेशन
जी हां, अगर शोध की माने तो दिसम्बर के महीने में सबसे अधिक डिप्रेशन के मामले सामने आते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस वक्त कोहरा होने की वजह से जहां आपको विटामिन डी कम मिलती है, वहीं सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे केमिकल भी निम्न स्तर पर होते है, जिससे आपके मन में उदासी और नकारात्मक सोच उपजती है।
Author: Yashodhara Virodai
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