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घर और आहार में पाए जाने वाले पर्यावरणीय दूषित पदार्थों का मानव और घरेलू कुत्तों में प्रजनन क्षमता पर समान प्रभाव डालता है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों प्रजातियों में शुक्राणु की गुणवत्ता में गिरावट को उजागर करने वाले एक नये अध्ययन में इसके परिणाम मिले हैं।
साइंटिफिक रिपोर्ट्स नामक जर्नल में प्रकाशित निष्कर्षों में उन रसायनों को दिखाया गया है जो पर्यावरणीय जोखिम से संबंधित हैं। यह मनुष्य और कुत्ते दोनों के शुक्राणुओं पर समान हानिकारक प्रभाव डालते हैं। इस बारे में ब्रिटेन के नॉटिंघम विश्वविद्यालय में पोस्ट डॉक्टरल छात्र सह लेखक रेबेका सुमन ने कहा "हम जानते हैं कि जब मानव शुक्राणु की गतिशीलता खराब होती है तो डीएनए में टूट बढ़ जाता है जोकि शुक्राणु में डीएनए के नुकसान के स्तर में वृद्धि से जुड़ा होता है।
हम मानते हैं कि पालतू कुत्तों में यह मनुष्यों के समान है क्योंकि वे एक ही घरेलू वातावरण में रहते हैं और एक ही घरेलू प्रदूषण के संपर्क में हैं।" शोध टीम ने दो मानव निर्मित रसायनों के प्रभावों का परीक्षण किया। शोधकर्ताओं ने पुरुषों और स्टड कुत्तों से शुक्राणु के नमूनों का उपयोग करके एक ही क्षेत्र में रहने वाले दोनों प्रजातियों के लिए समान प्रयोग किए।
इसके निष्कर्ष में पाया गया कि "यह नया अध्ययन उनके सिद्धांत का समर्थन करता है कि घरेलू कुत्ता वास्तव में मानव नर प्रजनन की गिरावट के लिए एक 'प्रहरी' या दर्पण है। हमारे निष्कर्ष मानव निर्मित रसायनों को इसकी वजह मानते हैं, जो व्यापक रूप से घर और काम के माहौल में उपयोग किया जाता है। यह शुक्राणु की गुणवत्ता में गिरावट के लिए जिम्मेदार हो सकता है।"
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