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भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है, लिहाजा यहाँ रोज़गार के अवसर अन्य देशों के मुक़ाबले औसतन ज़रा मुश्किल भरे हैं। बावजूद चूँकि काम के अवसरों की कमी हैं, विदेशी निवेश बढ़ रहा है और संसाधन भी हर जगह अखिल रूप से मुहैया है। ऐसे में रोज़गार का प्रश्न बेहद ज़रूरी हो जाता है। इस देश का नौजवान आज औसत आय का सपना ही नहीं देख पा रहा है और न ही उसके दिमाग़ में इसके बारे में कोई राय ही रह गई है, क्योंकि वास्तव में उसके सामने एक रोज़गार की एक मौलिक समस्या खड़ी हुआ है। ऐसे में ये जानना बेहद दिलचस्प हो जाता है कि आख़िर दुनिया के अन्य देशों के मुकाब़ले भारतीयों के पास रोज़गार की औसतन कमी क्यों है? आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं।
आपको बता दें कि दुनिया की दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी IBM की प्रमुख गिन्नी रोमेट्टी ने इस बारे में चौंकाने वाला ख़ुलासा किया है। जी हाँ, उन्होंने कहा है कि भारतीयों में नए ज़माने के अनुरूप कौशल ही नहीं है। हालाँकि उन्होंने इस बात को सिरे से ख़ारिज किया है कि भारत में रोज़गार के अवसर नहीं हैं। उनका कहना है कि अतीत में विश्वास करने के बजाए, कुछ अलग चीज़ों में विश्वास करना होगा। आपको यह भरोसा करना ही होगा कि डिग्री के मुक़ाबले कौशल ज़्यादा ज़रूरी है।
आँकड़ों की मानें तो लाखों बिज़नेस और इंजीनियरिंग स्कूल से डिग्री लेने वाले युवाओं में क़रीब तीन चौथाई युवा नौकरी करने के क़ाबिल ही नहीं होते हैं। यह भारत की शिक्षा व्यवस्था के साथ एडमीशन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़ा करता है।
IBM प्रमुख के मुताबिक़, भारत में धारणा से विपरीत पर्याप्त मात्रा में नौकरियाँ मौजूद हैं और जितनी नौकरियाँ हैं लगभग मात्र उतने ही युवा नौकरियाँ तलाश रहे हैं। ऐसे में भारत के भीतर बेरोज़गारी की कोई समस्या ही नहीं होनी चाहिए। लेकिन युवाओं में कौशल की कमी उनकी राह का रोड़ा है। इसलिए ज़रूरी है कि कंपनियाँ और सरकार इन युवाओं के साथ मिलकर काम करें तो परिणाम सुखद होगा।
Author: Amit Rajpoot
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