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2019 का प्रयागराज के कुंभ मेले ने सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान, सबसे बड़ी भीड़ प्रबंधन और सार्वजनिक स्थानों की सबसे बड़ी चित्रकारी अभ्यास के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान प्राप्त किया है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की तीन सदस्यीय टीम ने इस उद्देश्य के लिए प्रयागराज का दौरा किया था। 28 फरवरी से 3 मार्च तक चार दिनों तक टीम के समक्ष बड़े पैमाने पर जांच की।
गिनीज रिकॉर्डस की टीम ने पाया कि 28 फरवरी को एक बार में लगभग 503 शटल बसों को राजमार्ग पर सेवा दिया गया। कई लोगों ने 1 मार्च को एक पेंटिंग अभ्यास में भाग लिया और 10,000 कर्मचारी कुंभ में सफाई में लगे हुए थे। यही सारे वजह हैं जिससे इसका नाम गिनीज बुक में दर्ज हुआ है।
14 जनवरी से शुरू हुए इस महोत्सव का समापन 4 मार्च को छठे और अंतिम "शाही स्नान" के साथ महा शिवरात्रि के अवसर पर हुआ था। गिनीज बुक में कुंभ का नाम आने की जानकारी पर्यटन मंत्रालय ने दी। मंत्रालय ने कहा कि पिछले पांच शाही स्नान 22 करोड़ से अधिक तीर्थयात्रियों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुए।
जैसा कि सबको मालूम है कि इस बार का कुंभ मेले की रौनक ही कुछ अलग थी। साथ ही इस बार कुछ अलग कार्य भी इस मेले में हुए। जिसमें किन्नर अखाड़ा को सम्मान मिलना एक अलग उपलब्धि थी। यहां हर स्नान और शाही स्नान में साधुओं और करोड़ों लोगों ने जमकर हिस्सा लिया था। हालांकि यह एक अर्ध कुंभ मेला था जो कि हर छह साल में लगता है। वहीं कुंभ मेला हर 12 साल में देश के चार तीर्थस्थलों पर लगाया जाता है।
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