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आज हम बात करने जा रहे है छपरा के रितेश के बारे में आपको बता दें कि इस शख्स ने 2012 में दिल्ली के आईआईटी से बीटेक की पढ़ाई पूरी की है। वैसे तो आपने इकोवेशन ऐप के बारे में सुना ही होगा कि ये एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक पर आधारित है।
आपको बता दें कि आप इस ऐप से ये जान सकते है कि आप कैसे पढ़ें, क्या पढ़े जिससे आपके मार्क्स परिक्षा में अच्छे आ सकें। आप इस ऐप के दौरान विदेशी एक्सपर्ट से भी जुड़ सकते है। जो कि छात्रों के जुड़ कर उनकी समस्या को हल कर सकते हैं। इस ऐप को छपरा के रितेश ने ही बनाया है। इस ऐप की चर्चा छपरा से लेकर अफ्रीका तक हो रही है।
छपरा के रितेश ने आखिर क्‍यों बनाया 'इकोवेशन ऐप'
रितेश एक मध्यमवर्गीय परिवार से है। बचपन में ही पिता का देहांत हो गया। उसके बाद उन्होंने पढ़ लिखकर खुद को अपने पैरों में खड़ा किया। उनके मन में बचपन से ही एक ऐसी ऐप बनाने की चाह थी। जिससे मध्यमवर्ग के बच्चे उस ऐप के द्वारा अच्छी तरह से पढ़ पाए। आपको बता दें कि मध्यमवर्गीय परिवार से होने के कारण ऐप बनाने में आने वाला खर्च को झेलना आसान नहीं था, लेकिन तब भी उन्होंने हार नहीं मानी।
यूएन ने की रितेश की सराहना, अफ्रीकी देशों में भी दी जाएगी ऐप की मदद से शिक्षा
रितेश की मेहनत भारत तक ही नहीं, बल्कि विदेश तक भी गई है। आपको बता दें कि इस ऐप की मदद से करीब 100 से भी ज्यादा स्‍कूलों में इस ऐप के जरिए स्मार्ट क्लास दी जाती हैं। साथ ही इससे विदेश के स्कूलों में भी शिक्षा दी जाती हैं।
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