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महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र की दो बुजुर्ग महिलाएं जिन्हें दशकों पहले परिस्थितियों के कारण अपनी शिक्षा बंद करनी पड़ी थी, ने अब अपने उच्च अध्ययन के अपने लंबे समय के सपने को पूरा किया है। एक आदिवासी सहित दो महिलाओं ने हाल ही में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के नागपुर क्षेत्रीय केंद्र से अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों को पूरा किया।
इन दोनों को इग्नू की एक अन्य महिला छात्रा के साथ उनके दृढ़ निश्चय और अकादमिक उपलब्धि के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विश्वविद्यालय द्वारा प्रेरणादायक शैक्षणिक उपलब्धि पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ये महिलाएं एक तरह से मील का पत्थर साबित हुईं हैं।
नागपुर स्थित 62 वर्षीय आरती मुखर्जी जिन्हें 40 साल पहले स्नातक के अंतिम वर्ष में अपनी पढ़ाई बंद करनी पड़ी थी। लेकिन दशकों बाद उन्होंने बीए हिंदी कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया और दिसंबर 2018 में पाठ्यक्रम पूरा किया। इस बारे में उन्होंने कहा कि “इन सभी वर्षों में मेरे दिल में दर्द था कि मैं अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर कई मेरी मां को इसके बारे में पता था। जब आठ साल पहले वह बीमार थी उसने मुझे अपना सपना पूरा करने के लिए कहा।
मुखर्जी, जो अब एमए करने की योजना बना रही हैं, ने कहा कि अन्य महिलाएं जो अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सकी हैं उन्हें भी अपने सपने को पूरा करना चाहिए। "मुझे हमेशा से ही पढ़ाई पसंद थी।" वहीं 40 साल की गृहिणी मोनिका कासात जिन्हें भी पुरस्कार दिया गया था। उन्होंने 2010 में आयोजित बीए परीक्षा में इग्नू का स्वर्ण पदक हासिल किया था। अब उनकी एमए अंग्रेजी में शिक्षा को आगे बढ़ाने की योजना है।
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