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अकसर आपने लोगों को ये कहते सुना होगा कि फलां रत्न धारण करने के बाद भी कोई फायदा होता नहीं दिख रहा या रत्न धारण करने के बाद सब कुछ और भी ज्यादा उल्टा-पुल्टा हो गया या कहीं गलत रत्न तो धारण नहीं कर लिया।
वस्तुतः सभी रत्न अपना-अपना कार्य करते हैं और मनुष्य पर अपना असर डालते हैं। पर ऐसा क्यों होता है कि कुछ लोगों पर वे रत्न धनात्मक असर नहीं डाल पाते। इसका अर्थ है आप रत्नों को सही तरीके से धारण नहीं कर रहे हैं। वैदिक ज्योतिष में नवग्रहों का एक-एक रत्न निश्चित है और उनके उप रत्न भी होते हैं। वस्तुतः पहनने के बाद भी रत्न अपना प्रभाव तभी नहीं दिखा पाते क्योंकि उन्हें सही विधि से धारण नहीं किया जाता।
नवग्रहों के रत्नों को धारण करने का एक निर्धारित दिन तय है। संबंधी ग्रह के रत्न को उसके निश्चित दिवस ही धारण किया जाना चाहिए, तभी वह पूरा फलदायक होता है। जैसे
रविवार के दिन सूर्य के रत्न माणिक्य। सोमवार के दिन चंद्र के रत्न मोती। मंगलवार के दिन मंगल के रत्न मूंगा।बुधवार के दिन बुध के रत्न पन्ना।गुरुवार के दिन गुरु के रत्न पुखराज।शुक्रवार के दिन शुक्र के रत्न हीरा।शनिवार के दिन शनि के रत्न नीलम।शनिवार के दिन राहु के रत्न गोमेद।शनिवार के दिन केतु के रत्न लहसुनिया।
रत्नों का ज्योतिषीय लाभ लेने के लिए उसे अंगूठी में जड़वाते वक्त कुछ खास बातों का ध्यान रखना पड़ता है। मुद्रिका में रत्न इस तरह लगे कि अंगूठी तले की ओर से खुली रहे ताकि रत्न में से होकर निकलने वाली सूर्य का प्रकाश उससे पार होते हुए धारण करने वाले के देह में प्रवेश कर सके। साथ ही रत्न इस तरह मुद्रिका में जड़वाएं कि वो डालने वाले की अंगुली को नीचे से हल्का सा छूता रहे। इससे संबंधी रत्न की ताकत डालने वाले के देह में प्रवेश करती है।
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