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ओजोन परत धरती की रक्षा कवच माना जाता है परंतु आज इसमें लगातार कमी आ रही है आज एक विश्वव्यापी संकट है। ओजोन परत में छेद होने की पुष्टि वैज्ञानिकों द्वारा की जा रही है। ओजोन परत में छेद होने से सूर्य की पराबैगनी किरण धरती में प्रवेश कर जाती है जिसके कारण कई प्रकार की हानिया हो सकती हैं।
ओजोन परत में हो रही कमी को देखते हुए 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का गठन किया गया। जिसमें हानिकारक रसायनों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया और 16 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस मनाया जाता है। ओजोन परत में कमी की निम्नलिखित कारण है।
क्लोरोफ्लोरोकार्बन इसका मुख्य कारण है रेफ्रिजरेटर जी यंत्रों में सीएफसी का प्रयोग किया जाता है। यह गैस ओजोन परत के लिए बहुत नुकसानदायक है जब रेफ्रिजरेटर का उपयोग किया जाता है तो यह गैस वायुमंडल में मिलकर ओजोन को नष्ट कर देती है। हमारे दैनिक जीवन में उपयोग में आने वाले रेफ्रिजरेटर ऐसी आदि में प्रयोग होने वाले हैलोजन मिथाइल सीएफसी कारबन टेट्रा क्लोराइड आदि कई पदार्थ ओजोन परत के लिए नुकसानदायक है।
वनों की कटाई की ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने मैं सहायक है। आज के दौर में औद्योगिकरण नगरीकरण आदि के कारण लगातार वनों की कटाई हो रही है जिसे वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो रही है और ओजोन का बनना कम हो रहा है। गाड़ियों का अंधाधुंध प्रयोग बोलने से वायु में कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है। जिस से ओजोन परत प्रभावित हो रही है। प्राकृतिक आपदाएं ज्वालामुखी भूस्खलन आदि के कारण भी वायुमंडल में ओजोन के कोणों पर प्रभाव पड़ता है जिससे इनकी संख्या में लगातार कमी आ रही है। ओजोन परत हमारी रक्षा कवच है इसकी सुरक्षा के लिए सभी लोगों को मिलकर प्रयास करना आवश्यक है जिससे भावी जीवन में आने वाले कष्टों से बचा जा सके।
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