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बिनोद दुलु बोरा असम के नगांव ज़िले के चापानाला गाँव के रहने वाले हैं। इनकी कहानी बेहद दिलचस्प है। जी हाँ, आपको बता दें कि बिनोद दुलु बोरा असम के रहने वाले नौजवान वन्यजीव प्रेमी हैं, जिनकी कहानी किसी फ़िल्म की पटकथा सरीखी है। इन्होंने वन्य जीवों को बचाने के लिए कई ऐसे प्रयास कर दिखाये हैं, जो कि अक्सर फ़िल्मों में ही दिखाया जा सकता है। आज हम आपको इस नौजवान के बहादुरी भरे क़िस्से बताने जा रहे हैं, जिनहें जानकर आपके न सिर्फ़ रोंगटे खड़े हो जाएँगे बल्कि आप बिनोद दुलु बोरा से प्रेरित हुये बग़ैर रह ही नहीं पाएँगे।
एक बार की बात है बिनोद दुलु बोरा ने कुछ लोगों को एक किंग कोबरा साँप पर पत्थर बरसाते हुए देखा, तो उसे बचाने के लिए बिनोद उसके पास चले गये। इस दौरान कई पत्थर बिनोद को अपनी पीट पर खाने पड़े, जिससे उनकी पीछ लहू लुहान हो गयी। इतना ही नहीं, कहानी तो आगे बड़ी दिलचस्प है। हुआ यूँ कि जब बिनोद उस साँप को बचाने आगे गये तो उधर वह ग़ुस्सैल कोबरा भी इन पर झपटना चाहता था। हालाँकि इस वाकये को देख लोगों ने पत्थर बरसाना बंद कर दिया और वह कोबरा भी भाग खड़ा हुआ। ऐस में उसकी जान बच गयी।
लेकिन आपको यह जानना बेहद ज़रूरी है कि बिनोद दुलु बोरा ने सिर्फ़ एक किंग कोबरा भर की जान नहीं बचाई है, बल्कि इन्होंने अब तक ढाई हज़ार से अधिक वन्य जीवों को बचाया है। बिनोद द्वारा बचाये गये जीवों में हाथी के बच्चे, तेंदुए के बच्चे, चीनी पैंगोलिन, भालू के बच्चे, हिरण, सैकड़ों कछुए और सैकड़ों पक्षी आदि जीव शामिल हैं।
आपको बता दें कि बिनोद दुलु बोरा ने छह सौ से अधिक साँपों को भी मारे जाने से बचाया है, जिनमें चौदह किंग कोबरा भी थे। दिलचस्प है कि जो वन्य जीव बचाये जाने के क्रम में घायल हो जाते हैं, उन्हें विनोद अपने घर के पीछे रखते हैं और वहीं उनका इलाज करते हैं। वास्तव में बिनोद दुलु बोरा की कहानी दुनिया के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है।
Author: Amit Rajpoot
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