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माइग्रेन की समस्या से पीड़ित व्यक्ति इलाज करवाते हैं। लेकिन उनको कोई फायदा नहीं होता है। माइग्रेन दूर करने के लिए डॉक्टर तरह-तरह की दवाइयां देते हैं, जो इस समस्या से मुक्ति नहीं दिलाती है। बल्कि शरीर पर बुरा प्रभाव डालती है। हालांकि माइग्रेन की कुछ ऐसी दवाइयां भी है जो माइग्रेन को जड़ से खत्म कर देती है। अगर आप माइग्रेन की समस्या से जल्दी छुटकारा पाना चाहते हैं, तो आप दवाइयों के साथ-साथ योगा भी करें। आज हम आपको माइग्रेन से छुटकारा पाने के लिए 5 आसान से योगा बताने जा रहे हैं। माइग्रेन से छुटकारा पाने के लिए 5 आसान योगा बताने से पहले जान लते हैं क्या होता है माइग्रेन और क्या है माइग्रेन के लक्षण ?
क्या होता है माइग्रेन
माइग्रेन एक ऐसी बीमारी है, जिससे पीड़ित व्यक्ति को बार-बार या लगातार सिर में दर्द होता है। आम भाषा में माइग्रेन को अधकपारी कहते हैं। माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति को बहुत तेज सिर दर्द होता है, जो संवेदी चेतावनी संकेतों के साथ आता है। माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति को कुछ समय या लंबे समय तक परेशानी में रहना पड़ सकता है।
माइग्रेन के लक्षण
माइग्रेन से पीड़ित व्यक्तियों को मितली, डायरिया और उल्टी जैसी समस्या रहती है। इसके कारण मरीज के पेट में भोजन छोटी आंतों में बहुत समय बाद पहुंचता है। माइग्रेन की बीमारी के कारण मरीज का पाचन तंत्र प्रभावित होता है और रक्त प्रवाह भी धीमा हो जाता है। माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति के हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं। जब कोई भी आवाज या तेज रोशनी दिखाई देती है तो मरीज संवेदनशील हो जाता है।
माइग्रेन से छुटकारा पाने के लिए आसान योगा
अधोमुख श्वानासन करने से मस्तिष्क में रक्त परिसंचरण बढ़ जाता है और सिर दर्द में राहत मिलती है। अधोमुख श्वानासन करने के लिए आप घुटनों के बल खड़े हो जाए और उसके बाद अपने हाथों को जमीन पर रखें। ऐसा करने के बाद अब आप अपने शरीर का पूरा जोर हाथों पर दें और पैरों को वी आकार में फैलाएं। अब अपनी रीड की हड्डी को सीधा रखते हुए शरीर का ऊपरी भाग ऊपर की ओर खींचें। आप 1 मिनट तक ऐसा करें और फिर सामान्य अवस्था में आ जाएं।
प्रसारित पादोत्तासन
इस आसन को करने से ऑक्सिजनेटेड ब्लड से मस्तिष्क फ्रेश हो जाता है। माइग्रेन से राहत दिलाने के लिए यह सबसे बेहतरीन योगासन है। प्रसारित पादोत्तासन को करने के लिए आप पहले सीधे खड़े हो जाए और फिर अपने दोनों हाथों को साइड में सीधे रखें। इसके बाद अपने दोनों पैरों को अलग अलग रखें। ध्यान रहे पैर सीधी कलाई के नीचे हो। ऐसा करने के बाद आप अपने हाथों को सामने लाएं और जब तक सिर फर्श को न छू जाए, तब तक आगे बढ़े। फिर इसके बाद अपनी हथेलियों को फर्श पर रखें और कुछ मिनट तक ऐसी स्थिति में बने रहे और फिर सामान्य अवस्था में आ जाए।
शिशुआसन
शिशुआसन को चाइल्ड पोज भी कहा जाता है। शिशुआसन तनाव दूर करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। शिशुआसन को करने के लिए आप कूल्हों, जांघों, एड़ियों में हल्का-सा खिंचाव महसूस करेंगे। लेकिन इससे आपके मन को शांति मिलती है और शरीर की पूरी थकान और चिंता दूर हो जाती है। शिशुआसन को करने पर तंत्रिका तंत्र शांत हो जाता है और दर्द से भी मुक्ति मिलती है।
जानुशीर्षासन
जानुशीर्षासन से शरीर का पाचन तंत्र मजबूत होता है और ब्लड सरकुलेशन में सुधार होता है। जानुशीर्षासन को करने के लिए आप अपने पैरों को सीधा फैलाते हुए बैठ जाए। ध्यान रहे इस वक्त आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी रहे। ऐसा करने के बाद आप अपने बाएं घुटने को मोड़ने और बाएं पैर के तलवे को दाहिनी जांघ के पास रखें। इस बात का ध्यान रहें बायां घुटना जमीन पर रहे। गहरी सांस लें और अपने हाथों से सिर को ऊपर उठाएं और खींचकर कमर को दाहिनी तरफ घुमाएं। सांस छोड़ते हुए कूल्हों के जोड़ से आगे झुकें,रीढ़ की हड्डी सीधी रखते हुए, ठुड्डी को पंजों की और बढ़ाएँ। ऐसा करने के बाद आप यही क्रिया दूसरे पैर से भी करें।
हस्तपदासन
हस्तपदासन को करने से तंत्रिका तंत्र स्फूर्त से भर जाता है। साथ ही साथ रक्त संचार बढ़ता है और मन को शांति मिलती है। इस आसन को करने से कमर का दर्द ठीक हो जाता है और पेट अंदर से मजबूत होता है। चेहरा भी खूबसूरत हो जाता है।
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