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हर्निया एक ऐसी समस्या है, जिससे ऊतको को वसा की जितनी आवश्यकता होती है, उससे ज्यादा वसा ऊतकों को मिलती है। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो शरीर के आंतरिक अंगों का विकास बाहर की तरफ होना हर्निया है। हर्निया की बीमारी मांसपेशियां कमजोर होने के कारण होती है। विशेषज्ञों के अनुसार हर्निया बहुत ही सामान्य बीमारी है। लेकिन लोगों की लापरवाही की बदौलत हर्निया एक गंभीर बीमारी में तब्दील हो जाती है। हर्निया के लक्षण दिखाई और समझ नहीं पडते हैं। लोगों का मानना है कि हर्निया का ऑपरेशन होता है, जो सफल नहीं होते हैं। लेकिन ये गलत है। शोधकर्ताओं के मुताबिक हर्निया के 90% ऑपरेशन सफल साबित हुए, जिसके बाद हर्निया का खतरा नहीं हुआ।
हर्निया के प्रकार
इनगुइनल हर्निया हाइटल हर्निया अम्बिलिकल हर्निया इंसिज़नल हर्निया स्पोर्ट्स हर्निया
हर्निया के लक्षण
इनगुइनल हर्निया के लक्षण
इनगुइनल हर्निया का विकास ग्रॉइन में होता है। इस जगह पर उभार महसूस होने लगता है। जहां पर इनगुइनल हर्निया का विकास होता है, उतने भाग में सूजन आ जाती है, जिसकी वजह से जलन और दर्द की सनसनाहट महसूस होती है। इनगुइनल हर्निया में अगर आंते फूलने लगती है तो मरीज को दर्द, उल्टी और तेज बुखार चढ़ सकता है।
हाइटल हर्निया के लक्षण
हाइटल हर्निया में पेट की चर्बी आंतों के बाहर की ओर लटकने लगती है। विशेष अंगों के नीचे उभार महसूस होने लगता है। जिन अंगों पर उभार महसूस होता है, उनमे दर्द भी होता है। हाइटल हर्निया से पीड़ित लोग ज्यादा देर तक खड़े रहने में तकलीफ महसूस करते हैं। इसके अलावा हाइटल हर्निया के मरीजों को मल मूत्र त्याग करने में तकलीफ होती है।
अम्बिलिकल हर्निया के लक्षण
अम्बिलिकल हर्निया की परेशानियां ज्यादातर छोटे बच्चों में हो सकती है। छोटे शिशुओं की नाभि बाहर की ओर निकलने लगती है, जिससे अम्बिलिकल हर्निया की पहचान होती है। आमतौर पर अम्बिलिकल हर्निया बच्चों की मांसपेशियां मजबूत हो जाने पर ठीक हो जाती है। अगर ठीक नहीं होती है तो अम्बिलिकल हर्निया का इलाज करवाना पड़ता है।
इंसिज़नल हर्निया के लक्षण
लोगों में पेट की सर्जरी करवाने के बाद इंसिज़नल हर्निया की परेशानी हो सकती है। सर्जरी के दौरान पेट के जिस हिस्से पर चीर-फाड़ की जाती है, वह जगह इंसिज़नल हर्निया की समस्या से प्रभावित होती है।
स्पोर्ट्स हर्निया के लक्षण
स्पोर्ट्स हर्निया के मरीज के ग्रॉइन या पेट के ऊतक फट जाते हैं या उन पर असामान्य तनाव पड़ता है। इस कारण उससे प्रभावित अंगों में दर्द होने लगता है।
हर्निया के कारण
हर्निया की बीमारी कमजोर मांसपेशियों और तनाव दोनों के संयोजन से होती है। हर्निया की बीमारी विकसित होने में बहुत ही कम समय लेती है। हर्निया विकसित होने का समय हर्निया के कारण पर निर्भर करता है। हर्निया के कुछ मुख्य कारण निम्न है :-उम्र का बढ़ना लंबे समय तक खांसी बने रहना। किसी चोट्या या सर्जरी की कारण जो घाव होता है, उससे भी हर्निया की बीमारी हो सकती है। कब्ज के कारण भी हर्निया की बीमारी हो सकती है, क्योंकि इससे हमारे पेट पर दबाव पड़ता है। ज्यादा भारी चीजें उठाना। अचानक से वजन में बढ़ोतरी होना।
हर्निया से बचाव के उपाय
शरीर का वजन कंट्रोल करें। ज्यादा से ज्यादा पोषित आहार लें और कब्ज का इलाज करवाएं। मल और पेशाब त्याग करने के लिए ज्यादा ताकत का प्रयोग ना करें। भारी वजन उठाते समय ध्यान रखें की मांसपेशियों पर ज्यादा तनाव ना पड़े। खांसी बंद नहीं हो रही है तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें। अगर आपको हर्निया के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श ले और इसका इलाज करवाएं।
हर्निया का उपचार
हर्निया की बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए आपको अपनी जीवनशैली में परिवर्तन करना होगा। आपको हाइटल हर्निया से बचने के लिए आहर में परिवर्तन करना होगा। लेकिन इससे हर्निया हमेशा के लिए खत्म नहीं होती है। हर्निया की बीमारी से बचने के लिए पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा भारी भोजन नहीं करना चाहिए और भोजन करने के बाद झुकने और मुडने से बचना चाहिए। मसालेदार खाना जो ऐसिड पैदा करती है, उनसे परहेज करना चाहिए।हाइटल हर्निया के मरीज ओवर द काउंटर मेडिसन का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे पेट में एसिड की मात्रा कम होती है। हर्निया के लक्षण इन दवाइयों के इस्तेमाल से राहत दिलाते हैं। अगर हर्निया की बीमारी कम नहीं हो रही है और लगातार बढ़ती जा रही है तो आपको इसकी सर्जरी करवानी पड़ेगी। हर्निया बढ़ने के साथ-साथ दर्द भी बढ़ता है जो मरीज सहन नहीं कर पाता है। हर्निया का इलाज ओपन सर्जरी या लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से किया जाता है।
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