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जुगनुओं की चमक से रोशन रात हर कोई चाहता है, लेकिन दुःख इस बात का है कि अब जुगनू तो कहीं दिखाई बी नहीं पड़ते हैं। ऐसे में ये अब तो नसीब की ही बात बची है कि कोई जुगनू देख पाये। जी हाँ, आपको बता दें कि कभी गर्मियों के मौसम से लेकर देर ज्येष्ठ महीने तक हमारा और गुगनुओं का साथ होता है। उन्हें देखकर ऐसा लगता है मानों सितारों का संसार यहीं हमारी छत पर आ गया है। हमारे आसपास कभी-कभी तो एकदम हमारी हथेली पर ही जुगनुओं का बैठकर विश्राम करना अब गुजरे ज़माने की बातें हो चली हैं। बहरहाल, क्या कभी आपने ये सोचा है कि आख़िर जुगनू एक तरह का कीड़ा ही तो है, फिर ये ऐसे चमकता क्यों हैं?
वास्तव में जुगनुओं के चमकने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य अपने साथी को आकर्षित करना और अपने लिए भोजन तलाशना होता है। ये जुगनू आजकल विलुप्त से हो गये हैं। जी हाँ, वैसे तो पहले जुगनू गाँव और शहर दोनों ही जगह दिखते थे। लेकिन फिर धीरे-धीरे ये शहरों में कम होते गये और आजकल तो ये शहरों से बिल्कुल ही ग़ायब हो चुके हैं, लेकिन किसी-किसी में शायद दिख जाते होंगे। लेकिन वास्तव में आप अपने आप से एक बार पूछकर देखें कि आपने लास्ट टाइम जुगनू कब देखे थे, तो इससे आपको इनके विलुप्त होने का अंदाज़ा लग जायेगा।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जुगनुओं के शरीर में फास्फोरस होता है, जिसकी वजह से यह चमकते हैं, लेकिन इटली के एक वैज्ञानिक ने ये बात झुठला दी। उसने सिद्ध किया कि जुगनू की चमक फास्फोरस से नहीं, बल्कि ल्युसिफेरेस नामक प्रोटीन्स के कारण होती है।
दिलचस्प है कि मादा जुगनू के पंख नहीं होते हैं, इसलिए वह एक जगह ही चमकते हैं, जबकि नर जुगनू उड़ते हुए चमकते हैं। यही कारण है, कि नर जुगनू और मादा जुगनू को बेहद आसानी के साथ पहचाना जा सकता है।
Author: Amit Rajpoot
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