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भारतीय समाज में औरतों का गंजापन यानी कोई ऐसी औरत जिसके सिर पर एक भी बाल न हों बहुत कुछ बयाँ करता है। मसलन किसी औरत का विधवा हो जाना या किसी अन्य प्रकार के गहरे शोक को प्रदर्शित करना आदि। शायद कोई भी औरत अपनी छवि को इस हालत में कभी न तो देखना चाहेगी और न ही कभी इसकी कल्पना करना चाहेगी। यह बात और भी कन्ट्रास क्रिएट करती है, जब आपके साहित्यों में औरतों के केशों की न जाने किस हद तक तारीफ़ की गयी है और उनका महिमा मण्डन किया गया है।
ऐसे में आप सोच सकते हैं कि समाज में किसी औरत को गंजेपन के साथ रहना पड़े तो उसकी मानसिक हालात क्या होगी। इसी हालात से निकलकर ख़ुद को ‘मिसेज़ वर्ल्ड 2018 (फिलीपींस)’ के ताज़ से सुशोभित करने में कामयाब रही हैं 49 वर्षीय केतकी जानी।
दरअसल, केतकी जानी अलोपीसिया नाम की एक बीमारी से पीड़ित थीं, जिसके कारण ये पूरी तरह गंजी हो गयीं। इससे केतकी जानी का आत्मविश्वास डगमगा गया और ये डिप्रेशन में चली गयीं। ये दिनभर ख़ुद को घर में ही क़ैद रखतीं और रात में भी निकलतीं। ऐसा सालों चलता रहा। लेकिन अंततः ये इससे उबरने में क़ामयाब हुयीं और अपने गंजेपन को सहर्ष स्वीकार कर जीवन को नया मोड़ दिया।
केतकी जानी यहीं नहीं रुकीं, इन्होंने अलोपीसिया के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाने का काम किया और ख़ुद उन लड़कियों और महिलाओं के लिए इंस्पीरेशन बनीं जो इससे जूझ रही थीं। केतकी जानी ने कई जनों को आत्महत्या करने से भी रोका। फ़ेसबुक पर सपोर्ट एंड एक्सेप्ट अलोपीसिया नाम का पेज़ चलाया।
इतना ही नहीं इन्होंने लेट्स अनकवर अलोपीसिया यानी आइए, अलोपीसिया की हक़ीक़त को सामने लायें जैसा मिशन भी चलाया। वास्तव में केतकी जानी तब लोगों के लिए प्रेरणास्रोत और मिशाल बन गयीं जब इन्होंने ‘मिसेज़ इंडिया प्रतियोगिता’ में हिस्सा ले लिया। यहाँ इन्हें मिसेज़ इंस्पीरेशन अवॉर्ड मिला। इसके बाद फिलीपीन्स के मिसेज़ वर्ल्ड 2018 में इन्हें ‘मिसेज़ कॉन्फ़िडेंट’ चुना गया।
क्या है अलोपेसिया?
अलोपेसिया का पूरा नाम अलोपीसिया अरीटा है, जिसको स्पॉट बाल्डनेस यानी सिर के कुछ हिस्सों में बालों का नहीं होने के तौर पर जाना जाता है। वास्तव में यह एक ऑटोइम्यून रोग हैं, जिसमे सिर के कुछ या संपूर्ण हिस्सों से बाल झड़ जाते हैं। इसमें बाल ज्यादातर सिर की त्वचा से ही झड़ते हैं, क्यूंकि इसमें शरीर, स्वयं को ही पहचानना छोड़ देता हैं एवं अपने ही ऊतकों को नष्ट कर डालता हैं, जैसे की वो कोई आक्रमणकारी हो। आपको बता दें कि सबसे पहले यह सिर पर बाल रहित क्षेत्रों यानी कि गंजे धब्बों को निशान बना देता हैं। 1-2 फीसदी मामलों में यह सारे शरीर में यानी पूरे एपिडर्मिस में फ़ैल जाते हैं।
Author: Amit Rajpoot
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