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उर्दू की शायरी करने का शौक़ हममे से हर किसी को होता है। हालाँकि वैसे तो हर शायरी अपने आप में अहम होती है और उसके गहरे मायने भी होते हैं। लेकिन उर्दू में शायरी करने का मिज़ाज ही ज़रा कुछ जुदा होता है। सबसे ख़ास बात उर्दू शायरी में जो होती है वह है इसका अंदाज़-ए-बयाँ और बेहतरीन दिल को भीतर तक छू जाने वाला रस से सराबोर तलफ़्फ़ुस। मगर ध्यान रहे कि उर्दू की शायरियों में तलफ़्फ़ुस के साथ बहुत कुछ छिपा होता है। इसलिए ज़रूरी है उसे पहचानने की। वैसे तो पूरे के पूरे उर्दू शायरी के इतिहास से 10 शेर चुनकर निकाल पाना समुंदर से सीप निकालकर लाने जैसा है, फिर भी ये 10 शायरियाँ आपके रूह को ज़रूर छू लेंगी, ज़रूरत होगी तो केवल इनके मायनों को समझ पाने की।
1. डॉ. अल्लामा इक़बालः
“ख़ुदी को कर बुलंद इतना
कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे
बता तेरी रज़ा क्या है?”
2. बशीर बद्रः
“वो बड़ा रहीम-ओ-करीम है,
मुझे ये सिफ़त भी अता करे।
तुझे भुलाने की दुआ करूँ,
तो मेरी दुआ में असर न हो।”
3. साहिर लुधियानवीः
“हज़ार बर्क़ गिरे
लाख आँधियाँ उठें
वो फूल खिलके रहेंगे
जो खिलने वाले हैं।”
4. दाग़ देहलवीः
“आशिक़ी से मिलेगा,
ऐ ज़ाहिद!
बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता।”
5. अहमद फ़राज़ः
“रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ,
आ फिर से मुझे छोड़ जाने के लिए आ।”
6. राहत इंदौरीः
“ये क्या,
उठाये क़दम और आ गयी मंज़िल।
मज़ा तो जब है
के पैरों में कुछ थकान रहे।”
7. निदा फ़ाज़लीः
“घर से मस्जिद है बहुत दूर
चलो यूँ कर लें,
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए।”
8. मोमिन ख़ान मोमिनः
“वो जो हममे तुममे क़रार था
तुम्हें याद हो कि न याद हो!
वही, यानी वादा निबाह का,
तुम्हें याद हो कि न याद हो!”
9. परवीन शाकिरः
“बादल को क्या ख़बर,
बारिश की चाह में
कितने बुलंद-ओ-बाला
शजर ख़ाक हो गये।”
10. जिगर मुरादाबादीः
“ये इश्क़ नहीं आसाँ
इतना ही समझ लीजे,
इक आग का दरिया है
और डूब के जाना है।”
Author: Amit Rajpoot
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