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खानपान को लेकर सबसे ज़्यादा रिसर्च हमारे देश में ही हुयी है। जी हाँ, अगर आपको खाने पीने की सबसे सही जानकारी चाहिए तो इंडिया से बढ़िया दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं है जो आपको इतने विदिवत तरीक़े से खाने-पीने के बारे में जानकारी देगा। इस मामले में आयुर्वेद ज्ञान का भण्डार है, जहाँ आपको खाने पीने के लिए सबसे सही जानकारी मिलेगी। इस क्रम में आज हम इस बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे कि खाना बनाने के लिए घी या तेल में सबसे उपयुक्त क्या है? आपको बता दें कि खाना बनाने के लिए तेल और घी का प्रयोग करने से उसके अलग-अलग परिणाम हासिल होते हैं, इसलिए इस बात की जानकारी होना बहुत ही ज़रूरी है कि आपके लिए तेस और घी में से बेहतर विकल्प कौन सा होगा।
आपको बता दें कि तेल में हम जो कुछ भी बनाते हैं मसलन जलेबी, समोसा, चाट, पूरी, कचौड़ी, हलवा और अन्य कोई भी चीज़ अथवा हम तेल का तड़की ही लगाते हैं, वो सब एसिडिक यानी की शरीर में जलन पैदा करते हैं और पेट के लिए तीक्ष्ण, गर्म और भारी होती है। ऐसे भोजन का सेवन करने से सबसे बड़ा प्रभाव आँखों में पड़ता है। जी हाँ, तेल में बनी चीज़ों का सेवन करने से आँखों से संबंधित रोग होते हैं, जैसे- आँखों का नम्बर बढ़ना, धुँधलापन और अन्य दिक्क्के। इसके अलावा तेल में बनी चीज़ें वात का नाश करते हैं और पित्त को दूषित कर देते हैं। इसलिए तेल में बनी चीज़ों को आयुर्वेद सही नहीं मानता है।
ग़ौरतलब है कि आयुर्वेद के अनुसार घी में खाना पकाने से यह शरीर को हल्का रखता है और भीतर से स्वस्थ रखता है। इसके अलावा घी में पके भोजन के सेवन से त्वचा में कान्ति आती है। वायु के 180 से ज़्यादा रोगों को घी बना भोजन सही करता है। इतना ही नहीं वात को दुरुस्त करने में घी में पका भोजन काफी मददगार साबित होता है।
Author: Amit Rajpoot
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