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कोलकाता के मंटु हाइत को वनस्पतियों की सघनता से काफी प्यार है। लिहाजा वो दिन-ब-दिन कम हो रही वनस्पतियों और पेड़-पौधों की चिन्ता से ग्रसित हो चले। आपको बता दें कि मंटु हाइत पेशे से वकील हैं, जो कोलकाता में बढ़ रहे प्रदूषण से काफी चिन्तित हैं। चूँकि मंटु हाइत गाँव में पले-बढ़े हैं। इसलिए पेड़ों की कम होती संख्या और वातावरण की बदहाली से उन्हें काफी दुःख पहुँचा। दरअसल, मंटु हाइत जहाँ काम करने के लिए जाते हैं, वहाँ उन्हें माझेरहाट और न्यू अलीपुर स्टेशन से होकर गुजरना पड़ता था। इन दोनों स्टेशनों के बीच लगभग एक किलोमीटर तक फैली जगह को लोगों ने कूड़ा डालने की जगह में बदल दिया था। वहाँ से गुजरते हुए इतनी बदबू आती थी कि नाक में रूमाल बाँधकर गुजरना पड़ता था। इन सब बातों से मंटु हाइत बेहद व्यथित हो गये।
मंटु हाइत एक दिन अपनी गाड़ी लेकर उस कूड़े के ढेर वाले इलाक़े में पहुँचे तो देखा कि कूड़ा के ढेर के पास कुछ लोगों के घर भी बने हुए हैं। मंटु हाइत ने उन लोगों से बात कि तो पता चला कि कई वर्षों से इसकी शिकायत प्रशासन से की जा रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुयी। लिहाजा मंटु हाइत ने तय किया कि इस जगह पर यदि पेड़-पौधे लगा दिये जायें तो हल निकल आयेगा। लेकिन पता चला कि वो ज़मीन तो कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की है।
मंटु हाइत ने प्रशासन को अपनी योजना बताई लेकिन प्रशासन ने एक न सुनी। ऐसे में मंटु हाइत ने आसपास के लोगों से इजाज़त लेकर उस जगह पर गोरिल्ला गार्डनिंग शुरू कर दी। गोरिल्ला गार्डनिंग का मतलब यह होता है कि ऐसी जगह पर पौधे उगाना जिसका मालिक कोई और हो। मंटु हाइत यहाँ सुबह आते और पौधे लगाकर चले जाते।
पहले तो कुछ लोगों ने मंटु हाइत के इस काम में अड़ंगा लगाया और बाधा पैदा करते थे। वो बदमाश रात को आकर पेड़ उखाड़कर चले जाते थे। लेकिन वहीं कुछ दिन बाद आसपास के ही कुछ लड़कों और महिलाओं ने उन पेड़ों की रखवाली करनी शुरू कर दी। उपद्रवियों को जब पता चला कि मंटु हाइत पेशे से वकील हैं, तो वे डरने लगे और बाधा पैदा करना छोड़ दिये।ये तकरीबन दस साल पहले की बातें है। आज मंटु हाइत के प्रयास से वो कूड़े का ढेर एक हराभरा उपवन बनकर तैयार हो गया है, जहाँ लोग जाकर फलों का स्वाद लेते हैं और गर्मी के दिनों में छाया में विश्राम करते हैं।
Author: Amit Rajpoot
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