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दुनिया में ध्यान अथवा मेडिटेशन की अनेक विधियाँ हैं। लेकिन मेडिटेशन की तकनीक आसान होने से उसकी रेगुलरिटी मेंटेन रहती है। इसलिए यदि वह सरल और सहज हो ते बेहतर होता है। इसके अलावा ध्यान की कई विधियाँ हमें समझ में आती हैं और कुछ समझ में नहीं आती हैं। मसलन कई बार ध्यान लगाने के क्रम में हमें कुछ विधियों में यह बताया जाता है कि आपको ध्यान करते समय किसी अमुक मुद्रा में ही बैठना है। इससे होता यह है कि जब हम ध्यान लगाने बैठते हैं तो एकबारगी अंदर से हमें ऐसी ताक़तें धक्का देती हैं, कि हम अपनी इस ध्यान मुद्रा को भंग कर दें। ऐसे में बला जब हम ध्यान मार्ग को ही नहीं जा पाएंगे तो भला ध्यान कैसे ही लगाएँगे। इसलिए बहुत ज़रूरी है कि हम ध्यान की सरल विधि को अपनाएँ।
इसके लिए सबसे ज़रूरी है कि आप आराम से बैठकर ध्यान करें, यानी कि मन जिस ढंग से शान्त हो जाए हमें उस युक्ति को अपनाना चाहिए। जी हाँ, इसके लिए हम आज आपको ध्यान लगाने की एक ऐसी विधि बताने जा रहे हैं, जिसमें आपको न तो किसी विशेष आसन में बैठना है और न ही कोई और कहीं ध्यान लगाना है और न ही प्राणायाम करना है।
जी हाँ, इसके लिए आपको केवल अपनी आँख बंद करना होगा, फिर चाहे आप खड़े ही क्यों न हो। अब आप ज़रा अपने उन दिनों के बारे में याद करिए जब आपके स्ट्रगल के दिन चल रहे थे। अपने उन दिनों को याद करके आप अपने आप को स्वयं की चीज़ों को याद कीजिए। याद कीजिए कि आपको किन-किन लोगों ने भला-बुरा कहा और किन-किन लोगों ने आपकी मदद की। ध्यान बस ये रखना है कि इसमें किसी के संवाद को जगह नहीं देनी है।
इस ध्यान को करते वक़्त बस आप अपने आप को चलते हुए ही देखिए कि स्ट्रगल के दौरान आपको कब पानी की प्यास लगी और कब बूख लगी। कितना पैदल चलना पड़ा आदि-आदि। ऐसे पिक्चराइज़ेशन से आप मेडिटेशन से मिलने वाले रिजल्ट को पा जायेंगे और आपको लाभ होगा।
Author: Amit Rajpoot
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