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घनश्याम दास बिड़ला एक प्रेरणा का नाम है। ये नाम विश्वास और संघर्ष का है। सच पूछिए तो घनश्याम दास बिड़ला हमारे और आप की ही तरह कभी बेहद ग़रीब हुआ करते थे। लेकिन हमेशा से ही उन्हें ख़ुद पर तगड़ा यक़ीन था और उन्हें भरोसा सा कि एक दिन वो काफी बड़ा काम करेंगे। इसी भरोसे ने एक दिन उन्हें वो सबकुछ दे दिया जो हम और आप सब पाने के लिए दिन रात एक हुए रहते हैं। आपको बता दें कि वैसे को आज घनश्याम दास बिड़ला हमारे और आपके बीच नहीं हैं, लेकिन उनके जीवन के कुछ प्रेरणादायी क़िस्से ऐसे हैं, जो आज के युवाओं को और कुछ अलग काम करने की चाह रखने वालों के लिए उत्साहवर्धक है।
जी हाँ, सबसे पहले तो आपको यह बता दें कि घनश्याम दास बिड़ला की जब मृत्यु हुयी थी तो उनके पास तक़रीबन 200 कंपनियाँ थीं, जिनकी कुल सम्पत्ति क़रीब 2500 करोड़ थी। लेकिन शायद ये बात बहुत कम ही लोगों को पता होगी कि कभी घनश्याम दास बिड़ला अपने भाई के साथ एक किराये के कमरे में रहा करते थे। उसी कमरे में वह रहते और सी में खाना बनाते थे। इतना ही नहीं घनश्याम दास बिड़ला महज पाँचवी कक्षा तक ही पढ़े थे।
एक बार की बात है कि घनश्याम दास बिड़ला के भाई ने उनसे कहा कि हमारे हाथ में किसमत की रेखा नहीं है क्या? क्या हम हमेशा ऐसे ही रहेंगे? इस पर घनश्याम दास बिड़ला ने अपने भाई से कहा कि अपने हाथों को ध्यान से देखिए, इनके सहारे हम बहुत बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। इसलिए इसी पर भरोसा करना होगा। इनको देखा करो और यही एक दिन तुम्हारा मुक़द्दर सुधार देंगे।
घनश्याम दास बिड़ला ने अपने भाई के साथ मिलकर जूट का बिजनेस चलाने का मन बनाया और इस पर काम करना शुरू कर दिया। इसके रास्ते पर घनश्याम दास बिड़ला ने बहुत से अवरोध देखे, लेकिन वो घबराये नहीं और एक दिन जूट का बिजनेस चलाकर ही छोड़ा और एक दिन 200 कंपनियाँ खड़ी कर दी।
Author: Amit Rajpoot
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