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मशहूर शायर आल्लामा इक़बाल का एक शेर बड़ा ही मक़बूल हुआ है कि “ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले, ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है?” ये शेर वास्तव में कोई रूपक या फ़ीचर न होकर सच का साफ़ आईना है, जिसमें हर कोई ख़ुद को बाख़ूबी निहार सकता है। लेकिन इस आइने में निहारने से पहले इस बात का ध्यान देना बहुत ही ज़रूरी है कि इसमें आपकी तस्वीर उतनी ही स्पष्ट और सुन्दर दिखेगी, जितना की आप ख़ुद को निखार पाओगे। आपको बता दें कि अल्लामा इक़बाल के इस शेर को हक़ीकत में तब्दील कर डाला है उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ ज़िले के रहने वाले युवक बृजेश सरोज ने।
जी हाँ, आज बृजेश सरोज कोई मामूली व्यक्तित्व नहीं हैं, बल्कि आज ये अपने ही जैसे तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं और कल के भारत के एक बेहद मज़बूत हस्ताक्षर। वैसे तो बृजेश सरोज मुम्बई आईआईटी एक होनहार स्टुडेंट हैं, लेकिन ये अपने अन्य सहपाठियों से थोड़े जुदा हैं। जुदा इस मामले में कि जिस आईआईटी में दाख़िल के लिए भारत का हर तेज़-तर्रार छात्र सपना सजाकर बैठते है, वहाँ तक पहुँचने के लिए बृजेश सरोज के पास कोई रास्ता ही नहीं था, लेकिन इन्होंने अपने लिए न सिर्फ़ स्वयं रास्ता बनाया बल्कि उस कांटो भरे और ज्वलशील मार्ग पर चलकर सफ़लता भी हासिल की।
शायद यही कारण रहा होगा कि बृजेश सरोज से जाने-माने फ़िल्म अभिनेता आमिर ख़ान भी ख़ासा मुतासिर हुए। आपको बता दें कि बृजेश सरोज एक अनुसूचित जाति में शामिल पारिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं। इसके परिवार की माली हालत के चलते इन्हें सब्ज़ियाँ बेचनी पड़ती थी। इतना ही नहीं बृजेश सरोज ने शादी-ब्याह के अवसरों पर टेंट लगाने का भी काम किया है। इनके पिता गुजरात के सूरत में एक साधारण बुनकर हैं। ऐसे में इनके लिए आईआईटी के लिए सपना सजाना भी कल्पना से परे था।
लेकिन बृजेश सरोज के हौसले बुलंद थे। पढ़ाई के प्रति इनकी ख़ुद्दारी और निष्ठा अटूट थी। लिहाजा इन्होंने आईआईटी क्रैक कर ली और मुम्बई आईआईटी में इनका चयन हो गया। हालांकि दुख इस बात का है कि बृजेश सरोज की इस सफ़लता से इनके गाँव के सवर्ण बिल्कुल भी ख़ुश नहीं थे, उल्टे बृजेश और इनके परिवार के प्रति घृणा भाव रखते थे।
हैरानी तो इस बात की रही कि बृजेश सरोज जब घर से निकलते थे तो इन पर वे पत्थर मारकर अपना आक्रोश ज़ाहिर करते थे, बावजूद इसके बृजेश सरोज इससे विचलित नहीं हुए और अपने रास्ते पर आगे बढ़ेते ही जा रहे हैं। यही कारण है कि बृजेश सरोज आज लाखों ग़रीब और पिछड़े बच्चों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गये हैं।
Author: Amit Rajpoot
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