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अजनबियों से बात करने के लिए हमें बचपन से ही हमारे स्कूल टीचर्स और घर पर हमारे मम्मी-पापा और बड़ों के द्वारा मना किया जाता है कि हम कहीं भी अजनबियों से बातें न करें। वास्तव में आज के समाज को देखते हुए ये बातें सही भी हैं, लेकिन व्यवहारिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोंण से देखें तो अजनबियों से बातें करने के अपने निरा और ग़ज़ब के फ़ायदे हैं। जी हाँ, कबी-कभी रास्ते और जीवन के किसी किसी मोड़ पर वहीं ज़्यादा ख़ास हो जाते हैं, जो कभी अनजाने और अजनबी होते हैं। हालांकि अजनबियों से बातें करना हर किसी के लिए आसान भी नहीं होता है। फिर भी यदि ट्राई करें तो सब हो जाता है। आइए आपको अजनबियों से बातें करने के 5 ग़ज़ब के फ़ायदें बताते हैं।
1. इटरेस्टिंग ट्रैवेलः
जब हम अकेले किया यात्रा पर होते हैं तो बोर होने की गुंजिश बहुत ही ज्यादा होती है। ऐसे में हमारे पास क्या ही विकल्प होते हैं। या तो हम अपना फोन झाँक रहे होते हैं या फिर कानों में इयरफोन्स ढूँसकर बिना रुचि के ही गाना सुनने में लग जाते हैं। जबकि गाना हमें तभी आनन्दित करता है जब इसे सुनने में हमारी रुचि होती है। ऐसे में यदि हम साथ में यात्रा कर रहे किसी भी व्यक्ति से चाहे वो अजनबी ही हो, बातें कर सकते हैं और अपनी यात्रा को रुचिपूर्ण बना सकते हैं।
2. सांस्कृतिक आदान-प्रदानः
जब हम किसी अजनबी से बातें करते हैं तो सामने वाला जिस भी पृष्ठभूमि का होता है, हमें उसके बारे में विस्तृत जानकारी करने का मौक़ा मिल जाता है। यही काम हम भी करते हैं, जिससे वह भी हमे परिवेश से परिचित हो जाता है। ऐसे में अजनबियों से बात करने से सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता है।
3. बढ़ेगा ज्ञान का ख़ज़ानाः
कभी-कभी हमें ज़िन्दगी के किसी मोड़ पर ऐसे अजनबी मिल जाते हैं, जिनके पास ज्ञान का भारी पिटारा होता है। ऐसे में उनसे यदि हम बातें छेड़ देते हैं, तो हमें मुफ्त में काफी महत्वपूर्ण ज्ञान मिल जाता है। सोचिए, आपकी एक अदद चुप्पी आपको उस ज्ञान के अमूल्य घरोहर से दूर रख सकती थी। इसलिए अजनबियों से बात करना काफी अच्छा है।
4. मिलेगा कंफ़र्टः
जैसे हम कभी ऐसी जगह पर होते हैं, जहाँ थोड़ा सा अनकंफॉर्ट फील कर रहे हों, तो वहाँ मौजूद किसी भी व्यक्ति से फिर चाहे तो अजनबी ही क्यों न हो, हमें कंफ़र्ट फील दे देता है।
5. पॉज़िटिविटी एंड हैप्पीनेसः
कभी-कभी हमें किसी मोड़ पर ऐसा अजनबी इंसान मिल जाता है, जो वास्तव में इतना अजनबी ही नहीं होता है. या तो वो हमारे किसी रिश्तेदारी में निकल आता है, या फिर क्षेत्र विशेष का या फिर कभी-कभी हमारी रूह ही उसे अपना मानने लगती है। ऐसे में मेल-जोल बढ़ाने से हमें पॉज़िटिविटी फील होने लगता है और मन ख़ुशियों से भर जाता है।
Author: Amit Rajpoot
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