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हमारी फ़ैशन इंडस्ट्री ने समाज को दो फाँक में बँटकर रख दिया है। एक तरफ़ लड़कों के लिए बेहद कैज़ुअल और सुविधा जनक कपड़े तैयार करता है, तो वहीं महिलाओं के ज़्यादातर ऐसे कपड़े तैयार करता है, जैसे मानों कि उन्हें नुमाइश मात्र के लिए ही कपड़े पहनने होते हों। या हूँ कहें कि ये फ़ैशन इंडस्ट्री महिलाओं को महज प्रदर्शन की ही चीज़ समझता है और मानता है कि महिलाएँ केवल इसी लायक ही होती हैं।
इस बात को और भी स्पष्टता के साथ समझना हो तो ज़्यादातर फ़ैशन शोज़ में महिलाओं के लिए डिज़ाइन की जाने वाली ड्रेसेज़ देखिए और बताइए कि कपड़ों की चौहद्दी थान से उनके चमचमाते कपड़े उन्हें कितनी सहूलियत देते हैं और वो तारिकाएँ अपने उनको कपड़ों को साल में कितनी दफ़ा पहनती हैं। शायद फ़ैशन शो ख़त्म होने के बाद अथवा रेड कार्पेट में टहलने के बाद कभी नहीं।
वास्तव में ये उसी मंशा का परिणाम है, जिसके तहत पुरुषों की जींस में तो अच्छे ख़ासे गहरे जेब लगा दिये जाते हैं, लेकिन महिलाओं की जींस में नहीं, मानों महिलाओं को पैंट में जेब की कोई ज़रूरत ही नहीं होती। वास्तव में होती है, महिलाओं को भी उनकी पैंट में जेब की अच्छी ख़ासी ज़रूरत होती है।
उन्हें भी अपना पर्स अपने डेब में रखना होता है, उन्हें भी हर टाइम मोबाइल हाथ में लेकर चलना अच्छा नहीं लगता, कुछ देर मोबाइल जेब में रखना उन्हें भी चाहिए और हाँ, महिलाएँ भी स्कूटर और गाड़ियाँ चलाती हैं, तो उन्हें भी अपनी कार की चाभी अपने पास रखने के लिए जेब चाहिए। ज़रूरी नहीं है कि हर लड़की हरेक जगह पर्स या बैग लेकर घूमना पसंद करेगी! कुल मिलाकर लड़कियों के कपड़ों में जेब न होना एक झंझट पैदा करता है।
आपको बता दें कि इस फ़ैशन जगह में महिलाओं के लिए कपड़े केवल सुन्दर दिखने के लिए ही बनाए जाते हैं, न कि पहनने वाली की सुविधा के लिए। ग़ौरतलब है कि फैशन की ये बेहरमी महिलाएँ मध्यकाल से ही सहती आ रही हैं। महिलाओं के लिए मध्ययुगीन कॉरसेट से लेकर आज वॉयर लगी ब्रा इसके उदाहरण हैं, जिन्हें पहनो तो जान निकल जाती है। फ़ैशन का इतिहास भी हमें यही बताता है कि समय के साथ-साथ औरतों की स्कर्ट उनकी कमर और स्तनों को दर्शाने के लिए पतली और टाइट होती गयी।
इतना ही नहीं लड़कियों के लिए उनके जूते में हील का चलन चीन की उसी दुराग्रह का परिणाम है, जिसमें वहाँ लड़कियों को बटपन से ही छोटे-छोटे लोहे के जूते पहना दिये जाते हैं, जिससे कि उनका पैरा ज़्यादा बड़ा न हो। ऐसे माना जाता रहा है कि ऐसा करने से लड़कियों की वजाइना में कसाव आ जाता है और उनका हिप उभर आता है। फ़ैशन इंडस्ट्री को अपने इन तमाम कुफ़्रो को तोड़ना चाहिए और महिलाओं के लिए उपयोगी कपड़े तैयार किये जाने चाहिए।
Author: Amit Rajpoot
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