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घरों में आज स्टाइलिश और एक पल्ले का चलन ख़ूब बढ़ गया है। हालांकि इससे पहले हमारे घरों में दो पल्ले वाले दरवाज़े होते थे, जिन्हें हम किवाड़ कहते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि किवाड़ की जो जोड़ी होती है, उसका एक पल्ला पुरुष और दूसरा पल्ला स्त्री होती है। ये घर की चौखट से जुड़े रहते हैं। हर आगत के स्वागत में खड़े रहते हैं। खुद को ये घर का सदस्य मानते हैं। भीतर बाहर के हर रहस्य जानते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं, कि आख़िर हमारे घरों में दो पल्लों के किवाड़ों की क्यों आवश्यकता होती है।
आपको बता दें कि किवाड़ में एक पल्ला पुरुष का होता है और दूसरा स्त्री का। ये दोनों स्त्री-पुरुष रात को आपस में मिल तो जाते हैं, लेकिन अगली सुबह घर के लोग किवाड़ के पल्लों को चौखट से मिलने भी नहीं देते। इस घर में यह जो झरोखे और खिड़कियाँ हैं, यह सब इनके लड़के और लड़कियाँ हैं। तब ही तो, इन्हें बिल्कुल खुला छोड़ देते हैं। पूरे घर में जीवन रचा बसा रहे, इसलिये ये आती जाती हवा को खेल ही खेल में घर की तरफ मोड़ देते हैं। आपको बता दें कि दरवाज़े के ये दोनों पल्ले घर की सच्चाई छिपाते हैं। घर की शोभा को बढ़ाते हैं। घर में जब भी कोई शुभ काम होता है, तो लोग सबसे पहले इन्हीं को रँगवाते-पुतवाते हैं। हमारे जीवन मूल्य, संस्कार और हमारी संस्कृति ये सभी इन्हीं किवाड़ों के कारण सुरक्षित बने हुए हैं।
ग़ौरतलब है कि दो पल्लों के किवाड़ों पर बजने वाली साँकल की धुन के अपने संकेत होते हैं। सोचिए न, जब बड़े बाबू जी आते थे, तो कुछ अलग सी साँकल बजाते थे। घर के सब के सब लोग जान जाते थे कि आ गये हैं बाबूजी। इसके बाद बहुएँ अपने हाथ का हर काम छोड़ देती थी। उनके आने की आहट पाकर ये बहुएँ आदर में घूँघट ओढ़ लेती थी। अब तो कॉलोनी के किसी भी घर में किवाड़ रहे ही नहीं। अब तो दो पल्ले के घर नहीं, बल्कि फ्लैट हैं। इनके गेट एक पल्ले के खुलते हैं, वो भी सिर्फ एक झटके से। जिसके ख़ुलते ही पूरा घर बेखटके से दिखता है।
दो पल्ले के किवाड़ में किसी एक पल्ले की आड़ का सहारा लेकर घर की बेटी या नव वधू, किसी भी आगन्तुक को अपना चेहरा व शरीर छिपाकर उसके पूछे हुए सवाल बता देती थीं। लेकिन अब अब तो धड़ल्ले और बेखटके से एक पल्ले का किवाड़ खुलता है, जिसमें न कोई पर्दा न कोई आड़ होता है। इससे गंदी नज़र, बुरी नीयत, बुरे संस्कार सब एक साथ भीतर आते हैं। लेकिन अब हमारे समाज में बदलाव आ गया है, जहाँ कोई भी दो पल्ले के किवाड़ लगवाने से दूर होता है।
Author: Amit Rajpoot
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