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डॉ. हरशिंदर कौर सालों पहले अपने पति के साथ पंजाब और हरियाणा के सीमावर्ती इलाक़े के गुजर रहा थीं। दोनों पेशेवर डॉक्टर हैं। डॉ. हरशिंदर कौर और उनके पति जिस इलाक़े से होकर गुजर रहे थे वह बेहद ग़रीबी के जूझता इलाक़ा था, जहाँ पास में वे दोनों किसी मेडिकल कैंप के लिए जा रहे थे। कैंप पहुँचने के थोड़ी दूर पर ही दोनों ने एक नवजात की रोने की आवाज़ सुनी। ये आवाज़ कोई सामान्य आवाज़ नहीं थी, जिसे उन्होंने पास की खंती में बने हड़ावर, जहाँ मरे हुये जावरों को कुत्ते नोच कर खा रहे थे, से आते देखा गया। डॉ. हरशिंदर कौर और उनके पति ने पास जाकर देखा तो उनके रोंगटे खड़े हो गये और दोनों अवाक के अवाक रह गये। मालूम हो कि कुत्ते उस नवजात शिशु का हाथ नोच रहे थे, जो कि एक बच्ची थी।
इस घटना ने डॉ. हरशिंदर कौर को भीतर तक विचलित कर दिया था। उन दोनों ने पास के गाँव जाकर उस बच्ची के बारे में पूछताछ की, लेकिन किसी ने भी अपना मुँह नहीं खोला। एक आदमी ने स घटना ने डॉ. हरशिंदर कौर से जो कहा वह हैरान कर देने वाला था। उसने कहा कि हो कि सकता है कि वह बच्ची किसी ग़रीब की हो, जो उसे पालना न चाहता हो। इस घटना ने डॉ. हरशिंदर कौर को एक बार हौर हिलाकर रख दिया। इसके बाद तो डॉ. हरशिंदर कौर एक बड़े निर्णय पर पहुँचीं। उन्होंने तय किया कि अब से वह कन्या भ्रूण हत्या के ख़िलाफ़ काम करेंगी और लोगों को बेटियों के अधिकारों के प्रति जागरुक करेंगी।
इसके लिए डॉ. हरशिंदर कौर ने पटियाला के पास एक कम लैंगिक अनुपास वाले गाँव को चुना और सभी सुख-सुविधाओं को छोड़कर वहाँ जाकर रहने लगीं। पाँच सालों के भीतर डॉ. हरशिंदर कौर ने उस गाँव में चमत्कारिक बदलाव ला दिये। इसके लिए उन्होंने उस गाँव के मर्दों से जाकर बात की। उन्हें समझाया और जागरुक किया। दिलचस्प है कि पाँच साल बाद जब डॉ. हरशिंदर कौर उस गाँव से निकलीं तो वहाँ बच्चियों की संख्या बच्चों से अधिक हो चुकी थी।
कन्या भ्रूण हत्या की इस लड़ाई में डॉ. हरशिंदर कौर को सामाजिक विरोध भी झेलना पड़ा। एक वैश्विक सम्मेलन में जब इन्होंने अपने देश की ऐसी स्थित के बारे में ख़ुलकर राय ज़ाहिर की तो डॉ. हरशिंदर कौर को इस लड़ाई में दंड स्वरूप कई दिनों तक अस्पताल में काम नहीं करने दिया गया। फिलहाल साल 2008 में डॉ. हरशिंदर कौर ने अपने पति और कुछ दोस्तों के साथ मिलकर ‘डॉ. हर्ष चैरिटेबल ट्रस्ट’ बनाकर बेटियों को बेहतर बनाने के लिए कई तरह के प्रयास कर रही हैं।
Author: Amit Rajpoot
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