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भारत का इतिहास तीन खण्डों में विभाजित है- प्रचीन, मध्य और आधुनिक। इनमें से अगर हम भारत के मध्य कालीन इतिहास पर नज़र डालते हैं, तो वह कई रोचक बातों से भरा पड़ा है। जी हाँ, भारत का मध्यकाल रोचकता से भरपूर है। इन्हीं अनेक दिलचस्प पहलुओं में से एक है मुग़ल शहजादियों का कुँवारा रह जाना। ऐसे में ये जानना काफी ज़रूरी हो जाता है कि आख़िर वे कौन से कारण थे कि जहाँ एक तरफ़ इन मुग़लों की कई-कई बीवियाँ होती थीं, वहीं इनके घर की ज़्यादातर बेटियाँ या शहजादियाँ कुँआरी ही रह जाती थीं। आइए आज हम इसी बात की पड़ताल करने की कोशिश करते हैं।
शाहजहाँ के काल में भारत आये फ्रांसीसी यात्री बर्नियर की लेखनी और इसके जैसे कुछ और स्रोतों से पता चलता है कि मुग़ल बादशाहों के रुतबे और उनके बराबरी का रिश्ता उस समय भारत में मौजूद अन्य मुसलमान परिवारों में नहीं था। इसलिए अपने बराबरी के परिवार में अपनी शहजादियों का रिश्ता करने के लिए मुग़लों को ईरान जैसे देशों की ओर देखना पड़ता था। चूँकि ईरान भोगोलिक रूप से भारत से काफी दूर था, इसलिए ज़्यादातर मसलों में ईरान में इनका विवाह करना भी मयस्सर न था। इसी द्वंद्व में ज़्यादातर मुग़ल शहजादियों की शादी ही नहीं हो पाती थी।
इसका दूसरा बड़ा कारण यह भी थी कि शादी होने पर शहजादियों के सौहर या उनकी संताने शाही गद्दी के लिए ख़तरा साबित हो सकती थीं। इसके कई प्रमाणों से इतिहास भरा पड़ा है। इनमें सबसे बड़ा उदाहरण तो अकबर की बहन का सौहर शरीफ़ुद्दीन ही है, जिसने मुग़ल गद्दी हासिल करने के लिए अकबर पर ही जानलेवा हमला कर दिया था।
मुग़ल शहजादियों की शादी और उनके सौहर व बेटों द्वारा गद्दी हड़पने आदि की समस्याओं के कारण तथा अपने ही हैसियत में शादी करने के वास्ते मुग़लों ने माना कि भारत में उनके बराबर की हैसियत के अफ़गान हैं या फिर राजपूत। ऐसे में यदि इनके यहाँ रोटी-बेटी का संबंध हो जाये तो बेहतर होगा। हुमायूँ की इस सीख को अकबर ने अपनाया था, लेकिन राजपूतों की धार्मिक कुंठाओं ने अपने घर में मुग़लों की बेटियों को लाना पसंद नहीं किया।
यही कारण है कि अधिकांश मुग़ल शहजादियाँ जैसे हुमायुँ की बहन ग़ुलबदन बेग़म, अकबर की बेटियाँ शकरुन्निशाँ बेग़म और आरम बानो बेग़म, शाहजहाँ की बेटियाँ जहानआरा बेग़म और रोशनआरा बेग़म तथा औरंगज़ेब की बेटी जैबुन्निशाँ के साथा-साथ बादशाहों का ख़ास रिश्तेदारों की बेटियों को आजीवन कुँवारा ही रहना पड़ा था।
Author: Amit Rajpoot
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